जैन आचार्य जिन मणीप्रम सागर सुरीश्वर पधारे

धर्म

:- जैन आचार्य जिन मणीप्रम सागर सुरीश्वर पधारे
रामगंजमंडी :-

जयपुर मे चार्तुमास करके जयपुर में मोहनबाडी मे मंदिर में प्रतिष्ठा करवा कर झालरापाटन मे एक जनवरी को दादाबाड़ी की प्रतिष्ठा करवाने जा रहे।जैन श्वेताम्बर समाज के बड़े संतआचार्य जिन मणीप्रम सागर सूरीश्वरजी गुरुवार की सुबह रामगंजमड़ी पहुॅचे. आचार्य श्री की अगवानी करने पूरे श्री संघ के लोग सुकेत रोड ऋषभ फिलिंग स्टेशन पर एकत्रित हुए- जहां से बैन्ड बाजो एवम ढोल से आचार्य श्री और उनके साथ आए संत मलय प्रेम सागर जी को मंदिर लाया गया. महिला मंडल ने सिर पर कलश लेकर अगवानी की पूरे रास्ते रास्ते जैन समाज के लोगो ने चावलनारियल से गवली की।

मंदिर में भगवान आदिनाथ, पार्श्वनाथ, महावीर स्वामी एवम दादाबाडी मे चारो दादा गुरुदेव को वंदन करने
के बाद प्रवचन कक्ष में प्रवचन देतेआचार्य मणीप्रभ सागर सूरीश्वरजी ने कहा कि मैं 40 वर्ष पूर्व नागेश्वर तीर्थ की दादाबाडी की प्रतिष्ठा करवा कर अपने गुरु कान्ती सागर सूरीश्वर जी के साथ रामगंजमंडीआया था 50 वर्ष पूर्व की धुंधली यादे रामगंजमंडी, की मेरे जहन में आज भी है।

अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने उपस्थित लोगो से कहा कि जीवन को बांसुरी की तरह बनावे उन्होंने कहा कि बान्सुरी मे 5 विशेषताए होती है।
पहली बान्सुरी में कोई गाँठ नही होती,
दूसरी बासुरी खाली ओर पोली होती है,- तीसरी जब भी बोलती है मीठी बोलती है चोथी बान्सुरी बजने
मे कभी भेद नहीं करती चाहे अमीर बजाये चाहे गरीब बजाए, पांचवी जब बजाओ तब ही बोलती है,व्यर्थ नहीं बोलती जीवन को आदर्श बनाने
के लिये मौन भी जरूरी है।

आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य ओर पुरषार्थ दो शब्द है। पुण्य का उदय होना हमारे हाथ मे नही है. लेकिन पुरषार्थ करना हमारे हाथ में है।

धनवान बनना रुपवान बनना हमारे हाथ में नहीं है लेकिन सद्‌गुणों की प्राप्ति करना ओर कोध नही करना
हमारे हाथ में है। खुद के जीवन का निर्माण करना खुद के हाथ में है। इंसान धन दौलत, जमीन जायदाद और यश प्रसिद्धी के लिये लडाई झगडा करता है. पर जिन चीजों के लिये लड़ता है वह उसके साथ नही
जाती-
:- कोई गाली या अपशब्द कहे तो उसे रोंग नम्बर समझकर भूलने की नसीहत दी- जीवन का लक्ष्य परमात्मा बनना रखो ।

:- प्रवचन मे महाराज श्री ने उपस्थित पुरुषो और महिलाओं से कहा कि मनुष्य भव मुश्किल से मिला है। जीवन मे परमात्मा जैसा बनने का लक्ष्य रखो और परमात्मा जैसा बनने के लिये
बान्सुरी जैसा बनना जरूरी बताया।

परमात्मा की दुकान के हम मुनीम

आचार्य श्री ने कहा कि हम परमात्मा की दुकान के मुनीम है परमात्मा हमारे सेठ है। सच्चा सेठ वही होता जो अपने समर्पित मुनीम को भी सेठ बना दे। आचार्य श्री ने समाज के आर्थिक रूप
से कमजोर लोगों की मदद के लिये पूर्व पार्षद साक्षी पारख ओर साध्वी गुण रंजना श्री जी के साधारण भंडार व्यवस्था की भी सराहना की।. साथ ही रामगंजमंडी में हुए साध्वी गुणरंजना श्री जी के चार्तुमास को ऐतिहासिक बताया ओर साध्वी गुणरंजना श्री जी को सिंह के समान पराकमी बताया।

जैन श्वेतांबर श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि आचार्य जिन मणीप्रम सागर जी ने अभी तक
218 मंदिर और दादाबाडी की प्रतिष्ठाए करवाई है। साथ ही जहाज मंदिर मांडवला, अंबिका पार्श्वनाथ
तीर्थ उज्जैन, कुशल वाटिका बाडमेर, अमर सागर जैसलमेर, ओसिया जी, रामदेवरा, खेतासर (जोधपुर)
गज मंदिर मालपुरा, विक्रमपुर ओर कन्याकुमारी जैन तीर्थो का निर्माण करवाया है।
:- आभार व्यक किया:-

 

प्रवचन के दोरान अपने उग्र विहार से
समय निकाल कर रामगंजमंडी पधारने
के लिये जैन समाज के सुभाष बाफना, अजीत पारख, प्रदीप चतर, राजेंद्र रॉका, हुकम बाफना ने आचार्य भी का
आभार व्यक्त किया दरा से रामगंजमंडी तक विहार मे जैन श्री संघ के सुरेंद्र रांका, गोरव बाफना,रवि बाफना, प्रदीप चतर, सौरभ तिल्लानी, संकेत बाफना, संजय मेहता, सुशील गोखरु,, सुधीर पारख, सुभाष बाफना,
विनोद डोसी, कोमलचंद बोधरा, एवम पूर्व पार्षदसाक्षी पारख चले पैदल चले।

गुरुवार को आगमन 6 घंटे बाद हुआ विहार:-

झलारापाटन में 30 तारीख को नगर प्रवेश, 31 दिसंबरको वरघोडा ओर 1जनवरी को दादाबाडी की प्रतिष्ठा होने के कारण आचार्य श्री रामगंजमंडी 6 घंटे रुकने के बाद विहार कर गए. बिहार मे देवरीघरा
तक श्री संघ के कई लोग साथ चले.
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रामगंजमंडी श्री संघ की एकता की प्रशंसा की :-
आचार्य श्री ने रामगंजमंडी में मंदिर, स्थानक, तेरापंथ और दिगंबर समाज की एकता की तारीफ की ओर कहा
कि पूजा पद्धति और क्रिया अलग अलग हो लेकिन भगवान महावीर स्वामी ओर नमोकार मंत्र सबसे पहले हो यह भावना हमेशा रहनी चाहिये।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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