सम्मेद शिखर तीर्थ को पर्यटक स्थल घोषित करने के विरोध में मालवा महासंघ व नवरत्न परिवार की ओर से ज्ञापन सौंपा गया
रामगंजमडी
20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि अनंत मुनिराजो मोक्षस्थली को सरकार द्वारा पर्यटन स्थल घोषित किया जा रहा है इसको लेकर नवरत्न परिवार
रामगंजमंडी, मालवा महासंघ की ओर से ज्ञापन उप जिलाधीश महोदय को दिया गया इस अवसर पर नवरत्न परिवार शाखा रामगंज मंडी के अध्यक्ष विकास श्री श्रीमाल, उपाध्यक्ष संदीप मेहता, मीडिया प्रभारी महावीर धूपिया, संजय जैन के साथ अमन बोहरा, विकल्प डांगी, संजय बाफना, अंशुल मेहता, विशाल जैन एडवोकेट, पारस जैन एडवोकेट, मालवा महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश धारीवाल मौजूद रहे। मालवा महासंघ नवरत्न परिवार रामगंजमंडी ने अपने-अपने ज्ञापन उप जिलाधीश महोदय को दिए। यह ज्ञापन राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री महोदय भारत शासन नई दिल्ली के नाम दिए गए ज्ञापन में यह मांग की गई है कि पारसनाथ वन्य जीव अभ्यारण एक भाग जैन धर्म का पवित्रतम स्थल माना जाता है और दुनिया भर में बड़ी संख्या में जैन तीर्थ यात्री यहां नियमित रूप से आते हैं। पारसनाथ पर्वत राज और मधुबन को बिना जैन समाज की सहमति के इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत घोषित कर पारसनाथ पर्वत को वन्य जीवन अभयारण्य का एक भाग लिखकर प्राचीन जैन तीर्थ की स्वतंत्र पहचान पवित्रता नष्ट करने वाली झारखंड सरकार की अनुशंसा पर केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक 2795 दिनांक 2 अगस्त 2019 से बाहर किया जाए। श्री सम्मेद शिखरजी पारसनाथ पर्वत राज और मधुबन को मांस मदिरा अपनी बिक्री मुक्त पवित्र जैन तीर्थ स्थल घोषित किया जाए पारसनाथ पर्वत राज वंदना मार्ग को अतिक्रमण लक्ष्य सामग्री बिक्री मुक्त कर यात्री पंजीकरण यात्री सामान जांच हेतु स्केनर सहित पर्वत के आरंभ में और शीतल नाला चेकपोस्ट और पर्वत पर सोलर लाइट्स ओवर शुद्ध जल व्यवस्था आदि उपलब्ध कराई जाए। केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 21 जनवरी 2018 को झारखंड की रघुवर दास सरकार की अनुशंसा पर पारसनाथ पर्वत 49.33 किलोमीटर और मधुबन की परिस्थितिकी इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत घोषित करने के लिए 60 दिनों के अंदर लोगों की आपत्ति या सुझाव मांगने के लिए अधिसूचना क्रमांक 798 के अ तहत किसी साजिश के तहत सिर्फ अपनी वेबसाइट पर ही प्रकाशित किया था। जबकि अधिसूचना को दो मुख्य समाचार पत्रों और एक स्थानीय भाषा के समाचार पत्र में प्रकाशित करने के साथ ममें स्थित जैन समाज के शीर्ष संस्थाओं को सूचित किया जाना चाहिए था। गजट की मुख्य पेज पर लिखा है कि गजट की प्रतियां जनता को उपलब्ध करा दी गई थी जबकि ऐसा नहीं किया गया और यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत दी गई है। केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा दिनांक 2 अगस्त 2019 को अंतिम अधिसूचना जारी की गई प्राप्त जानकारी के अनुसार मात्र 130 सुझाव एवं दो आपत्ति मंत्रालय को आए जिसमें एक भी जून की आपत्ति सुझाव नहीं है ऐसा क्यों?
अतः सरकार के इस निर्णय से श्री सम्मेद शिखरजी पर पर्यटन स्थल बनाने से पूरे क्षेत्र की पवित्रता और पावन ता को झटका लगेगा जैन आचार्य समाज जन द्वारा इसे धार्मिक आस्था पर प्रहार बताया है। श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल ना बनाया जाए बल्कि इस पूरे क्षेत्र की पवित्रता गरिमा एवं

श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखा जाए और इसे धार्मिक स्थल ही बने रहने दिया जाना चाहिए। ज्ञापन में यह मांग की गई है कि समाज का मानना है कि यह पहाड़ उनका धार्मिक स्थल है। पर्यटक स्थल घोषित करते ही यहां पर पर्यटकों की भीड़ में मांस और शराब का सेवन का चलन बढ़ेगा। इससे धार्मिक स्थल की पवित्रता प्रभावित होगी। श्री सम्मेद शिखरजी ऐसे पावन और पवित्र स्थल पर पर्यटन स्थल बनने से रोका जाना चाहिए।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंज मंडी की रिपोर्ट
