आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज एव मालवा नंदन आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज का हुआ मिलन
भवानीमंडी
विगत कई दिनों से भवानीमंडी धर्म की गंगा में डुबकी लगा रहा था एक और जहां पूर्व में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का प्रवास भवानी मंडी में रहा जिसमें सभी ने बढ़ चढ़कर भाग लिया एवं 27 मार्च को मालवा गौरव श्वेतांबर संत मुनि श्री विश्व रतन सागर महाराज का भी मंगल आगमन हुआ था।
खास बात यह रही कि पूज्य आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज एवं आचार्य श्री के बीच संयुक्त रूप से धर्म चर्चा भी हुई जो जो सर्वधर्म समभाव के साथ एक एकता का पर्याय बन गई। इस बेला में भवानी मंडी नगर के नगर गौरव मुनि श्री शौर्य रत्न सागर महाराज भी मौजूद रहे। यदि हम शौर्य रत्न सागर महाराज के बारे में जाने तो भवानी मंडी के बोहरा परिवार के यह एक सदस्य थे जो धर्म भक्त थे। और वह मुनि बनकर आए आचार्य श्री ने अपनी प्रज्ञा डायरी में लिखते हुए कहा कि बोहरा परिवार के एक युवक को मुनि रूप में देख कर अच्छा लगा।

शुक्रवार की प्रातः बेला में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने गरोठ की ओर जब मंगल विहार किया तो सभी की आंखें नम थी ऐसा लग रहा था उड़ चला पंछी रे हरी भरी डाल से रोको रे रोको कोई इनको बिहार से।

शुक्रवार की संध्या बेला में अपनी अंतिम आनंद यात्रा करते हुए आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि भीतर देखने के लिए आंखों को बंद करना जरूरी है। बाहर का संसार देखने के लिए आंखें खोलने पड़ती है, लेकिन आत्मा का साक्षात्कार करने के लिए आंखें मूंदनी पड़ती हैं।

जैन परंपरा का उल्लेख करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि दुनिया में जैन परंपरा एक ऐसी परंपरा है जिसमें ना भगवान किसी से कुछ लेते हैं और ना ही देते हैं। लेकिन उनके द्वार पर जाने वाले को सब कुछ मिल जाता है। सनातन संस्कृति में केवल निष्काम भक्ति का महत्व है।
आचार्य श्री ने कहा कि श्रद्धावान को मांगने की जरूरत नहीं पड़ती भगवान स्वयं उसकी चिंता कर लेते हैं। भारतीय संस्कृति में पिता पुत्र से ज्यादा गुरु शिष्य और भक्त भगवान का महत्व है। हमें प्रतिदिन दो कम से कम पुण्य कार्य अवश्य करना चाहिए। इस बेला में महाराज श्री ने नगर में बनाई जा रही नंदीशाला एवं पक्षी घर बनाए जाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
