झूठ बोलने की बजाय हमें सच का सहारा लेना चाहिए विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी (राज.) में विराजित धर्म की महती प्रभावना कर रही है । जयपुर, निवाई , चाकसू आदि समाज गुरु माँ की चर्या से जुड़ रही है ।
पूज्य माताजी ने सभी को मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि – झूठ बोलने की अपेक्षा हमें सच का सहारा लेना चाहिए। वास्तव में झूठ बोलने की भावना व्यक्ति के कर्म बांधती है। जब कोई व्यक्ति आज झूठ बोलता है तो उसे अगले जन्म में उन कर्मों का फल मिलता है। इसलिए आपको कभी भी झूठ बोलने का इरादा नहीं रखना चाहिए।



झूठ बोलने के कई दुष्परिणाम होते हैं जो हमारे लिए दुःखदायक होते हैं । आप लोगों का विश्वास खो देंगे और जब आप दूसरों का विश्वास खो देंगे, तो एक व्यक्ति के रूप में आप अपना मूल्य खो देंगे। कोई भी आप पर विश्वास नहीं करेगा। यदि कोई आपसे झूठ बोलता है और आपको पता चल जाता है, तो आपको दुख होता है तो,आपको यह समझना चाहिए कि यदि आप झूठ बोलते हैं, तो इससे दूसरों को दुख होता है। एक झूठ छुपाने के लिए हमें और झूठ बोलना पड़ सकता है।
जब आप झूठ बोलते हैं तो आपको पकड़े जाने पर बेचैनी और डर महसूस होता है। जब कोई व्यक्ति अपने स्वार्थी उद्देश्यों के लिए झूठ बोलता है, तो इसका परिणाम पशु साम्राज्य में पुनर्जन्म होता है। यदि आप पुण्य कर्मों के प्रकट होने के दौरान झूठ बोलते हैं तो हो सकता है कि आप पकड़े न जाएं, लेकिन अगले जन्म में आपको इसकी सजा मिलेगी।
अगले जन्म में यदि आप सच भी बोलेंगे तो आपको झूठ बोलने का दोषी ठहराया जाएगा, जिससे आपको बहुत कष्ट सहना पड़ेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
