सोनकच्छ में प्रवेश के साथ शुरू हुई अमृत प्रवचनमाला.गुस्सा को आदमी या व्यक्ति या अतिथि नहीं है जो आता हो,गुस्सा तो आप होते है प्रज्ञासागर महाराज
सोनकच्छ
गुस्सा को आदमी या व्यक्ति या अतिथि नहीं है जो आता हो,गुस्सा तो आप होते है।जरा सी अपेक्षा की उपेक्षा हुई कि आप गुस्सा हुए।आपको लगा कि आपकी इन्सल्ट हो रही है तो आप गुस्सा हुए।गुस्सा आपके भीतर ही है वह आता नहीं है, उपस्थित होता हैं।क्रोध एक बचकानी हरकत है जिसे सिर्फ बच्चे करते है।आप कहेंगे ऐसा नहीं है गुस्सा तो सभी को आता है।मैं मानता हूं कि गुस्सा सभी उम्र के लोगों को आता है लेकिन जब गुस्सा आता है एक युवा,एक बूढ़ा भी बच्चा हो जाता है।क्योंकि बच्चा गुस्सा करके ही अपनी ताकत दिखाता है।आप भी जब कमजोर होते है तो गुस्सा करके अपनी ताकत ही दिखाते है इससे ज्यादा और कुछ नहीं करते।
उक्त विचार सोनकच्छ मंगल प्रवदश के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञासागर महाराज ने व्यक्त किये।
पुरानी स्मृति को महाराज श्री ने बताया
पूज्य महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में पुरानी स्मृति को लाते हुए उन्होंने कहा
-आज यहाँ बैठकर 29 साल पहले की याद ताज़ा हो रही है।1993 का वह समय जब मेने तरुणसागर जी महाराज के साथ यहाँ पर चातुर्मास किया था वह एक स्वर्णिम इतिहास है।मैं इस बीच भी सोनकच्छ आया लेकिन सुबह आया शाम को चला गया।लेकिन इस बार में चार दिन का चातुर्मास करने के लिए आया हूँ।आप चाहे तो इन चार दिनों में चातुर्मास का आनंद ले सकते है।
इस अवसर पर सोनकच्छ जैन समाज के अलावा अन्य समाज के भी बहुत से लोग उपस्थित थे।साथ कॉंग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी के नेतागण भी शोभायात्रा एवं धर्मसभा में शामिल रहे।सभी ने श्रीफल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया।
पुष्पगिरी से विहार से पहले सभी मंदिरों के दर्शन किये।शांतिधारा देखी।गुरुदेव से गंधोदक लगवाया फिर निकलने के लिए जैसे ही महाराज श्री बाहर आए कि बारिश होने लगी अतः कुछ देर मुनिसुव्रतनाथ जी के मन्दिर में बैठकर बारिश बंद होने का इंतजार किया।।फिर महाराज श्री पहाड़ से नीच उतरे तो मुख्य द्वार पर पहुंचते ही फिर से बारिश होने लगी।अतः वही रुककर फिर बंद होने का इंतजार किया।जब बारिश हल्की हुई तो वहाँ से विहार किया।देखते देखते बारिश पूरी तरह से रुक गई और सूरज निकल गया।इसी के साथ सैकड़ों महिला पुरुषों ने मङ्गलमय आगवानी की।जगह जगह रगोली पूरी गई।पुष्पवृष्टि की गई।
ललित उज्जैन से रांगोली वाला तो इंदौर से पन्नियों को मशीन के माध्यम से उड़ाने वाला स्पेशल रूप से बुलाया जो आकर्षण का क्रेंद्र रहा।सभी धर्म और जाति के लोगों ने पुष्पवृष्टि करके आशीर्वाद लिया।समाज के अध्यक्ष श्री रविन्द्र जैन एवं सचिव महेंद्र जैन के नेतृत्व में सोनकच्छ में शानदार प्रवेश हुआ।प्रवेश के साथ ही भगवान के दर्शन किये फिर धर्म सभा की शुरूआत हुई।मंच संचालन श्री महेंद्र जैन ने किया।प्रवचन के बाद आहारचर्या हुई।दोपहर में तत्त्वार्थ सूत्र जी की क्लास हुई।फिर सामूहिक प्रतिक्रमण किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
