आचार्य प्रणामसागर महाराज की एक माह की मौन साधना पूर्ण
छत्रपति संभाजीनगर
राजाबाजार स्थित श्री खंडेलवाल दिगंबर जैन पंचायत पार्श्वनाथ मंदिर में आचार्य डॉ. प्रणामसागर महाराज का भक्तामर प्रभावना चातुर्मास उत्साह से जारी है। उनके सानिध्य में रोजाना विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस श्रृंखला में पिछले 48 दिन से श्री हीराचंद कस्तूरचंद कासलीवाल प्रांगण स्थित आचार्य गुप्तीनंदी गुरुदेव सभागृह में जारी भक्तामर विधान सहित पिछले 22 अगस्त से आचार्य प्रणामसागर महाराज की मौन साधना समापन समारोह उत्साह से संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहर के कोने-कोने के जैन समाज के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
पंचामृत अभिषेक के बाद किया पाद प्रक्षालन
आरंभ में भगवान का पंचामृत अभिषेक, महाशांतीधारा प्रमोद कुमार ठोले परिवान की ओर से किया गया। बाद में आचार्यजी का पाद प्रक्षालन किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना पंचायत अध्यक्ष महावीर पाटणी ने रखी, जबकि संचालन पंचायत के सचिव प्रकाश अजमेरा ने किया। इस अवसर पर विश्वस्थ किरण पहाड़े, महावीर ठोले, अरुण पाटणी, नीता ठोले, चंदा कासलीवाल, संतोष सेठी, चातुर्मास अध्यक्ष एड. अनिल कासलीवाल, कार्याध्यक्ष संजय पहाड़े, रवि सेठी, अशोक गंगवाल, दिनेश ठोले, रमेश पाटणी, अरिहंतनगर जैन मंदिर के अध्यक्ष
आचार्य ने समझाया साधना का महत्व
आचार्य प्रणामसागर महाराज ने मौन साधना का महत्व कैसा होता है. यह समझाते हुए कहा कि वाणी मधुर तो मौन अमृत है। मौन रहना कई समस्याओं का समाधान है। मौन स्वयं को स्वयं से जोड़ने का काम करता है। मौन से बढ़कर कोई शांति नहीं है। मौन रहने से स्वयं की आवाज सुनने को मिलती है। इसी तरह मौन रहने से ज्ञान व स्मरण शक्ति बढ़ती है। इस तरह का मार्गदर्शन डॉ. प्रणामसागर महाराज ने किया।
संतोष अजमेरा, विपिन पांडेय, काजू कासलीवाल, सुरेखा पाटणी, संगीता सेठी, सपना पापड़ीवाल, मोना सेठी सहित विश्वस्थ मंडल व चातुर्मास समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
