संसार को त्यागे बिना कोई मोक्ष नहीं जा सकता आचार्य श्री विहर्ष सागर महाराज
दमोह
त्याग से ही भगवान बन सकते हैं। संसार को त्यागे बिना कोई मोक्ष नहीं जा सकता मनुष्य मलिक बनेगा तो गुलाम हो जाएगा, क्योंकि वह जिस चीज का मालिक बनता है उसे उसकी चिंता हो जाती है।
आचार्य श्री ने नन्हे मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही चिंता के विषय में समझाते हुए आचार्य श्री ने कहा की चिंता चिता के समान है। हमारा जीवन दर्पण की तरह होना चाहिए। दर्पण टूट कर भी झूठ नहीं बोलता और हम टूटने के डर से सत्य नहीं बोलते। एक दर्पण सारे शास्त्रों का निचोड़ होता है।
दर्पण सभी का समान रूप से स्वागत करता है। वह किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करता है। जो जैसा होता है उसको वैसा ही आईना दिखा देता है। सबका स्वागत करता है लेकिन संग्रहण नहीं करता है।

उन्होंने कहा कि जैन दर्शन यही कहता है कि सबका स्वागत करो, लेकिन दर्पण की तरह मन को स्वस्थ रखो।
तो मन सदैव निर्मल रहेगा निर्मल मन में ही तीर्थ है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

