हमारी दैनिक चर्या में आचरण में कई जानी वाली क्रिया चाहे वो धार्मिक हो या कार्मिक उसमें हमे हिंसा का विवेक रखना अति आवश्यक है। शुद्धसागर महाराज
कोटा
पूज्य मुनि शुद्ध सागर महाराज ने आज धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी दैनिक चर्या में आचरण में कई जानी वाली क्रिया चाहे वो धार्मिक हो या कार्मिक उसमें हमे हिंसा का विवेक रखना अति आवश्यक है। यदि हम अहिंसा का पालन नही कर रहे है तो हम अधर्म कर रहे है। यदि हम धर्म के मार्ग को अंगीकार करना चाह रहे है तो हमे अहिंसा व्रत का पालन करना ही होंगा।हमे हमारी धार्मिक क्रियाओं को अहिंसा की कसौटी पर कसना होंगा।
पूज्य मुनिश्री ने कहा धार्मिक क्रिया किसी भी पध्दति से की जाए किंतु उसमें हमे इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा कि हमारी क्रिया से हिंसा तो नही हो रही है।मंदिरों में जाने से भगवान के गुणानुवाद से अपनी इच्छाओं की पूर्ति की भावना रखना मिथ्यात्व है।भगवान को अपनी इच्छापूर्ति का माध्यम बनाना आगम प्रमाण नही है।
वक्ता की प्रमाणिकता से ही बात की प्रमाणिकता होती है,धर्म की बात,चर्चा को आगम की कसौटी पर जांच करना चाहिए,अपना विवेक काम मे लेना चाहिए।हमे धर्म को अपनी सुविधा से नही आगम की प्रमाणिकता से करना चाहिए अन्यथा हम हिंसा के पात्र बन जायेंगे और अपने लिये नरक का मार्ग प्रशस्त करेगे।

इस अवसर पर समाज के गणमान्य सदस्य एवं पदाधिकारी तथा रावतभाटा के श्रावक महावीर जी दुगेरिया भी उपस्थित रहे।
राजकुमार लुहाडिया से प्राप्त जानकारी के साथ
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
