दुनिया गलत नहीं होती,हम गलत होते है…. आचार्य प्रज्ञासागर
कालापीपल
आदमी दुखी है और दुख के कारण है।अतः दुख से मुक्ति के लिए दुख के कारणों को जानकर उनका निवारण करना करना चाहिए।उदाहरण की तौर पर आपकी पत्नी से नहीं बनती है तो आप एक डायरी बनाइये और उसमें वे सभी कारण लिखिए जिनसे आपको शिकायत है-जैसे-पत्नी का स्वभाव अच्छा नहीं है, वह बात बात पर क्रोध करती है, उसे मेरे माता पिता की परवाह नहीं है, उसे बच्चों को सम्हालना नहीं आता,वह बच्चों को कैसे पढ़ाना चाहिए यह भी नहीं जानती,उसे व्यवहार निभाता नहीं आता,वह मेरे परिवार का ख्याल नहीं रखती है, उसके खर्चे जरूरत से ज्यादा है,वह पति को पति मानती ही नहीं है इस तरह के जितने भी प्रश्न आपके मन में उठे उन प्रश्नों को डायरी के एक एक पन्ने पर एक एक प्रश्न लिखें और उन्हें लिखने के बाद अपने आपसे वही प्रश्न पूछे कि क्या मेरा स्वभाव अच्छा है?क्या मुझे क्रोध नहीं आता?क्या मैं उसके माता पिता की परवाह करता हूँ?क्या मैं बच्चों को सम्हलता हूँ?आदि सभी प्रश्न अपने आप से पूछे यदि आपके अपने आप सेपूछे सवाल के जवाब हां में मिलें तो समझना ताली दोनों हाथ से बीज रही है अतः अपने में सुधार लाएं जो आप पत्नी में देखना चाहते है उसे पत्नी को दिखाएं उसमें परिवर्तन न आएं तो मुझसे कहिएगा।

उक्त विचार तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने मन्दिर के बाहर बने पांडाल में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा मैंने लोगों को सुख से जीने के सूत्र दिए।-दुनिया गलत नहीं होती,गलत हम होते है। लेकिन हम दूसरों को गलत कहकर अपनी गलतियों को ढाकते है।आदमी की यह आदत होती है कि वह हमेशा से अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों के सिर पर फोड़ता रहा है।अतः इस बात गम्भीरता से समझें और अपने नर्क बन रहे जीवन को स्वर्ग बनाने की कोशिश करें।
प्रवचन के समय उज्जैन से उपस्थित हुए तपोभूमि के संस्थापक अध्यक्ष अशोक जैन चायवाले ने श्रीफल समर्पित करके आशीर्वाद प्राप्त किया।प्रवचन के बाद आहारचर्या हुई।
दोपहर में तत्त्वार्थ सूत्र जी की क्लास लेते हुए मैंने नव लब्धियो में क्षायिक दान लब्धि के बारे में विस्तार से बतलाते हुए सद्बोध दिया।इस लब्धि में भगवान सिर्फ क्षायिक अभय दान ही देते है।वे आहार औषध और ज्ञान दान इस लब्धि द्वारा नहीं देते।क्लास के बाद प्रतिक्रमण किया।
शाम को आनंदयात्रा भी आज सड़क पर बनें पंडाल में ही हुई।जहाँ महाराज श्री ने कहा-वक्त के साथ चलना सिखलो या वक्त बदलना सीखलो।मैं कहता हूं जो समय के साथ जीना सीख जाते है समय उनका हमेशा साथ देता है लेकिन जो ऐसा नही कर पाते है वे हर समय को दोष देते नजर आते है।मैंने कहा-जो पिता की अंगुली और भगवान के चरण पकड़कर जीता है उसे दुनिया में कोई भी आसुरी शक्ति परास्त नहीं कर सकती है।इसलिए हमें अपने हिसाब से सोना चाहिए लेकिन जागना भगवान के हिसाब से चाहिए मतलब रात आप कभी भी सोओ लेकिन जागो सूर्योदय के साथ ही।जो सूर्योदय के साथ जागते है उनका भाग्य कभी नहीं सोता है।आनंदयात्रा कि तहत तीन प्रश्न पूछें।श्री अनूप अग्रवाल,श्रीमती रेखा जैन और अनिल सोनी ने सही जवाब दिए जिन्हें श्रीमती मिसरबाई की ओर से पुरस्कार प्रदान किये गए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
