वैराग्य की आवश्यकता ज्ञान नेत्र को खोलने के लिए है समय सागर महाराज

धर्म

वैराग्य की आवश्यकता ज्ञान नेत्र को खोलने के लिए है समय सागर महाराज
कर्रारपुर

निर्यापक श्रमण समय सागर महाराज सानिध्य में नगर में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव हो रहा है। बुधवार की बेला में तपकल्याण महोत्सव मनाया गया। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैराग्य की आवश्यकता ज्ञान नेत्र को खोलने के लिए है। ज्ञान होते ही नेत्र खुल जाते हैं। कार्य होने के बाद पश्चाताप होता है। कार्य के पहले नहीं होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनीति से कमाने वालों को ही अकाल मृत्यु का निमित्त बन सकता है। वैराग्य होने के लिए छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा निमित्त मिल सकता है। परंतु वैराग्य हो यह जरूरी नहीं।
तब कल्याणक महोत्सव की बेला में बोलते हुए मुनि श्री ने कहा कि काम भोग और बंद की जो कथा है वह अनादि कालीन है और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में चलती ही चली जा रही है। उन्होंने इस बात की सीख दी की धर्म चरित्र के क्षेत्र में विलंब नहीं करना चाहिए। आप जीवन जी नहीं रहे हैं वरण आप मरण की ओर यात्रा कर रहे हैं। आगम में कई प्रकार के मरण के उल्लेख मिलते हैं। उन्होंने एक प्रश्न करते हुए कहा कि आपने दीपक को जलाया है तो हम यह पूछना चाहते हैं कि दीपक जल रहा है? दीपक प्रतिफल बुझने की ओर चला जा रहा है। उसी प्रकार हमारा जीवन चल नहीं रहा है मरण की ओर जा रहा है। इसीलिए वैराग्य अति शीघ्र होना चाहिए।

 

उन्होंने आगे कहा कि संसारी प्राणी स्वयं अपराध करता चला जा रहा है, और निमित्त के ऊपर दोष देता है। इसी का नाम अज्ञानता है। इंद्रिय सुख से प्राप्त होने वाला सुख सापेक्ष है।

संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *