हमारा कर्तव्य है कि हमारे धर्म क्षेत्र और हमारे आयतनों को यदि कोई भी सरकार मिटाने की कोशिश करेगी तो हम साधू संतों को भी सामने आना पड़ेगा निर्दोष सागर महाराज

धर्म

हमारा कर्तव्य है कि हमारे धर्म क्षेत्र और हमारे आयतनों को यदि कोई भी सरकार मिटाने की कोशिश करेगी तो हम साधू संतों को भी सामने आना पड़ेगा निर्दोष सागर महाराज

विदिशा

हमारा कर्तव्य है कि हमारे धर्म क्षेत्र
और हमारे आयतनों को यदि कोई भी सरकार मिटाने की कोशिश करेगी तो हम साधू संतों को भी सामने आना पड़ेगा। श्री सम्मेद शिखर तीर्थ हमें प्राणों से भी प्यारा है ।

यह उदगार संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहे।

मुनि श्री ने कहा कि जब एक तिर्यंच भी संत की रक्षा के लिये अपने प्राणों को न्योछावर कर देता है,तो हम और आप तो मनुष्य है, हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हमारा शाश्वत क्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी क्षेत्र की रक्षा करने के लिये समाज के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक परिवार का कर्तव्य है सकल जैन समाज द्वारा जो भी रुपरेखा
बनाई जा रही है, उसमें सभी को तन मन धन से सहयोग करना चाहिये।
उपरोक्त जानकारी देते हुये सकल जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 18 दिसंम्वर रविवार को दौपहर एक बजे माधवगंज चौक से मुख्यमार्ग से तिलकचौक से गांधीचौक तक जैन समाज श्री सकल दिगंबर जैन समाज, श्री श्वेतांबर जैन स्थानक संघ, श्री तारण तरण जैन समाज तथा सभी जैन मूर्तीपूजक संघ के संयुक्त तत्वावधान में श्री सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित कर अध्यादेश पारित करने के विरोध में प्रदर्शन किया जाऐगा। एवं जिला प्रशासन के माध्यम से केन्द्र सरकार , झारखंड सरकार को श्री सम्मेदशिखर शाश्वत सिद्ध क्षेत्र को पर्यटन स्थल पिकनिक स्पाट घौषित करने की जो अधिसूचना केन्द्र सरकार ने जारी की है उसे अविलम्ब रद्द करने की मांग की जाएगी।

 

 

 

1. ‘पारसनाथ पर्वतराज’ को वन्य जीव अभ्यारण्य, पर्यावरण पर्यटन के लिए घोषित इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत जोनल मास्टर प्लान व पर्यटन मास्टर प्लान, पर्यटन / धार्मिक पर्यटन सूची से बाहर किया जाएँ!
2. ‘पारसनाथ पर्वतराज’ को बिना जैन समाज की सहमति के इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत वन्य जीव अभ्यारण्य का ‘एक भाग’ और तीर्थ ‘माना जाता है’ लिखकर तीर्थराज की स्वतंत्र पहचान व पवित्रता नष्ट करने वाली झारखण्ड सरकार की अनुशंसा पर केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना क्र. 2795 (ई)दिनांक 02अगस्त 2019 को अविलंब रद्द किया जाए!
3. ‘पारसनाथ पर्वतराज’ और मधुबन को माँस-मदिरा बिक्री मुक्त पवित्र “जैन तीर्थस्थल” घोषित किया जाए!
4. पर्वतराज की वन्दना मार्ग को अतिक्रमण, वाहन संचालन व अभक्ष्य सामग्री बिक्री मुक्त कर यात्री पंजीकरण,सामान जांच हेतु CRPF व स्कैनर,CCTV कैमरे सहित दो चेक पोस्ट चिकित्सा सुविधा सहित बनाये जाए!
5. पर्वतराज से पेड़ो का अवैध कटान, पत्थरों का अवैध खनन और महुआ के लिए आग लगाना प्रतिबंधित हो!

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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