जीवन बहती धार है,धर्म ही उसकी नाव है– मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज

धर्म

जीवन बहती धार है,धर्म ही उसकी नाव है– मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज
(भोपाल)
जीवन निरंतर बहने वाली एक ऐसी धारा है जिसमें स्थायित्व की कामना करना बहती गंगा में खूंटा गाड़ने जैसा हैयह विचार मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने 1100 क्वाटर, भोपाल में प्रातःप्रवचन सभा में व्यक्त किये।

 

 

मुनिश्री ने कहा कि परिवर्तनशील संसार में स्थाई कुछ भी नहीं है,फिर भी मनुष्य वही स्थाई बनाने की भूल करता है जो बदलने के लिए ही बना है, यही भ्रम उसके दुख का कारण बनता है,मनुष्य दिन भर जिस व्यवस्था को स्थायी मान खूंटे गाड़ता है, वह रात होते-होते बहकर निकल जाती है।”धार में खूंटा नहीं,नाव चाहिए!”

 

 

 

एक मार्मिक रूपक के माध्यम से मुनिश्री ने कहा —
“आदमी गंगा की बहती धार में खूंटे गाड़ता है, मुगरी से ठोकता है, और सोचता है कि यह टिक गया… पर बहती धार में कुछ टिकता नहीं,इस प्रवाह में टिकना है तो धर्म की नाव चाहिए।”मुनि श्री ने ज़ोर देकर कहा कि संसार सागर में तंबू गाड़ने की कोशिश व्यर्थ है, लेकिन धर्म की नाव पर बैठकर जीवन रूपी धारा को पार किया जा सकता है।

 

उन्होंने चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
1.अवसर पाना
2. अवसर खोना नहीं
3. अवसर का लाभ उठाना
4. नए अवसरों की तलाश करना
उन्होंने मनुष्य जन्म को ही एक महान अवसर बताते हुये कहा कि “आज हमारे पास देव, गुरु, धर्म – तीनों का संगम है, घाट भी मिला है, नाव भी, और उसे चलाने वाला भी, अब यदि कोई इस नाव पर न बैठे तो वह सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली कहलाएगा,उन्होंने “धर्म की नाव के चार खंभे बताते हुये कहा कि दान, पूजा, शील, और उपवास बताते हुये कहा कि “दानम दुर्गति नाशनम्” दान से दरिद्रता का नाश होता है।पूजा आत्मा की पवित्रता और भगवान से जुड़ाव का माध्यम है, वही शील से संयम, मर्यादा, और व्रतों की रक्षा होती है, उपवास: आत्मशुद्धि का माध्यम है,उन्होंने दान की भावना पर प्रेरक प्रसंग सुनाते हुये कहा – जैसे एक वृद्ध माता जिनके बेटे ने धोखे से मकान बेच दिया, लेकिन उन्होंने अपनी बची पेंशन से दान कर धर्म की नाव को पकड़ लिया
मुनिश्री ने सभी से आग्रह किया कि वे गुरुकुल के विकास में सहभागी बनें
गुरुकुल गौरव,गुरुकुल नायक,lविद्या विभूति,गुरुकुल मित्र जैसे पावन दायित्व लेकर अपने पुण्य को सार्थक करें।

उन्होंने बताया कि चातुर्मास की कलश स्थापना 13 जुलाई, गुरु पूर्णिमा 11 जुलाई, और नेमिनाथ मोक्षकल्याणक 2 जुलाई को भव्यता से आयोजित होगा। आप सभी लोग नाव पर चढ़ो और डूबने से बचो
मुनिश्री ने चेताया:”यदि तुम धर्म की नाव पर सवार नहीं होगे, तो इस संसार की मध्यधारा में डूबते ही रहोगे। धर्म ही वह नाव है जो तुम्हें इस पार से उस पार तक सुरक्षित, आनंदित और मुक्त भाव से पहुंचा सकती है,उन्होंने श्रोताओं को आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करते हुये जीवन के हर क्षण को अवसर मानते हुए उसका सार्थक प्रयोग करने की प्रेरणा दी।

 

अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *