बच्चो को संस्कारित शिक्षा देने के लिए परिवार की रूचि आवश्यक–प्रदीप शास्त्री सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल बच्चो ने मन मोहा
अशोक नगर —
संस्कारित शिक्षा संस्कृति को सुरक्षित करतीं हैं। बच्चो में भारतीय संस्कारों का बीजारोपण अच्छी तरह से हो सकें तब ही वह अपनी संस्कृति को समझ कर जीवन भर हर मोड़ पर याद रखेंगे। इसलिए मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने बच्चो को संस्कारित शिक्षा पर जोर दिया है। इसमें परिवार की भूमिका अहम है। यदि परिवार चाहेगा तो बच्चे पाठशालाओं तक पहुंचकर अपनी परम्परा को खेल खेल में समझ सकेंगे।
उक्त आश्य के उद्गार श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से पधारे श्री प्रदीप कुमार शास्त्री जयपुर ने सुभाषगंज में श्रमण संस्कृति संस्थान के रजत वर्ष पाठशाला पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए
इसके पहले समारोह का शुभारंभ नृत्यमई मंगलाचरण शान्ति नगर के बच्चो द्वारा किया गया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन मुख्य अतिथियों ने किया।
रजत वर्ष से जुड़ना हमारे समाज के लिए गौरव की बात है भानु चौधरी
इस दौरान मंत्री भानू चौधरी ने कहा कि मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने इस धरा में त्रिकाल चौबीस स्थापित कराकर इस नगर को तीर्थ का रुप दे दिया। श्रमण संस्कृति संस्थान के रजत वर्ष से जुड़ना हमारी समाज के लिए गौरव की बात है। बच्चो को संस्कारित शिक्षा के लिए उनके आशीर्वाद से मन्दिर के साथ पाठशाला व विद्यालयों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ये हमारी संस्कृति को सुरक्षित करेंगे।
श्रमण संस्कृति संस्थान से देश को युवा विद्वान मिल रहे हैं–विजय धुर्रा

मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि श्रमणसंस्कृति संस्थान को स्थापित हुए पच्चीस वर्ष होने जा रहे हैं, मुनिपुंगव श्री
सुधासागरजी महाराज का सोच था जो आज श्रमण संस्कृति संस्थान के माध्यम से हमें युवा विद्वान मिल रहे हैं। संस्थान का यह रजत वर्ष चल रहा है। जिसे हम उत्साह से मना रहे हैं। इस वर्ष में हमारे नगर की पाठशाला का देश की तीन सौ पिचयासीपाठशालाओं में सर्वश्रेष्ठ आना गौरव की बात है। और ये संस्कार मुनि पुंगव श्री सूद श
सुधासागरजी के आशीर्वाद से ही मिले हैं ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
