अपने गुरु का दीक्षा दिवस मनाना मेरा सौभाग्य है विमर्श सागर महाराज
भिड़
पूज्य आचार्य विमर्श सागर महाराज के सानिध्य में आचार्य प्रवर विराग सागर महाराज का 40 वा दीक्षा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस क्रम में विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया गया। वही भक्तों ने भक्ति भाव के साथ आचार्य श्री का अष्ठ द्रव्य से भक्तिमय पूजन किया। इस बेला में जयकारों के से वातावरण भक्ति में हो गया।
पूज्य आचार्य श्री सुबह भीषण शीतलहर के बीच चैत्यालय जैन मंदिर से पद बिहार करते हुए शांतिनाथ जिनालय में दीक्षा दिवस मनाने हेतु आए। दीक्षा दिवस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे दिन पूजा-अर्चना का दौर चला। माई भक्तों ने भगवान की भक्ति और आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के भजनों पर अभूतपूर्व नृत्य की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर आचार्य विमर्श सागर महाराज ने गुरु गुणानुवाद करते हुए कहा कि प्रत्येक शिष्य के लिए अपने गुरुदेव का दीक्षा दिवस मनाना सौभाग्य की बात होती है। आज एक बार फिर मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने अपने दीक्षा को स्मृति मिलाते हुए कहा कि गुरुदेव ने 14 दिसंबर 1998 भिंड के अतिशय क्षेत्र बरासो में मुझे मुनि दीक्षा प्रदान की थी। गुरु ने मुझे दीक्षा देकर मुझे नया जीवन दिया था। उनके उपकारों में कभी भुला नहीं पाऊंगा। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने 9 दिसंबर 1983 के दिन औरंगाबाद में मुनि दीक्षा ली थी। इनको आचार्य पद 8 नवंबर 1992 में सिद्ध क्षेत्र द्रोणागिरी में प्राप्त हुआ था।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
