जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है विनम्र सागर महाराज

धर्म

जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है विनम्र सागर महाराज
विदिशा
“जैन संस्कृति गुणग्राही संस्कृति है” इस संस्कृति में अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय और लोक में स्थापित सभी साधुओं को उनके गुणों के आधार पर नमस्कार किया है, साथ ही साथ आचार्यों ने उस निकृष्ट जीव सुअर को भी कर्म की निर्जरा का कारण बताते हुये उच्च स्थान दिया है।

 

 

 

यह उदगार मुनि श्री विनम्रसागर जी महाराज ने अरिहंत विहार जैन मंदिर प्रांगण में श्री सिद्दचक्र महामंडल विधान के पांचवे दिवस प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि तन का सुअर तो कर्म की निर्जरा कर मोक्ष चले जाते है लेकिन जो मन के सुअर होते है वह पंच इन्दियों के व्यसनों में रमण कर इसी संसार में पड़े रहते है। उन्होंने शास्त्रोक्त कथा के माध्यम से कहा जंगल में लोट रहा सुअर शेर की गुफा में एक ध्यानस्थ मुनिराज को देखता है और गुफा के द्वार पर रक्षक बन शेर से युद कर मुक्ति को प्राप्त करता है।

 

 

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि जैन संस्कृति ने आत्मा के शोधन की बात तो की है, लेकिन कभी व्यक्ति विशेष को नमस्कार नहीं किया जब जब भी “णमो अरिहंताणं” बोला आंख बंद करके जितने भी अरिहंत हुये है उन सभी को नमस्कार कर लिया, “णमो सिद्धाणं” बोला तो जितने भी सिद्ध हुये उनको नमस्कार कर लिया इसी क्रम में आचार्य उपाध्याय और लोक में सभी साधुओं को उनके गुणों के आधार पर नमस्कार कर अपने आपको धन्य धन्य महसूस किया है।

एक संस्मरण को सुनते हुए महाराज श्री ने कहा कि एक बार मेंने पूज्य गुरुदेव से पुछा कि महाराज आप तन के सुअर की इतनी प्रशंसा करते है, तो गुरुदेव ने मुस्कुरा कर कहा कि प्रथमानुयोग में जिस सुअर का कथानक भगवान के गुणगान के साथ लिखा है उसको आवास दान के लिये हमेशा हमेशा याद किया जाता है, जिसने अपने प्राण देकर एक ध्यानस्थ मुनिराज की रक्षा की थी लेकिन “मन के सुअर वह होते है जिनकी पांचों इन्द्रियाँ हमेशा व्यसन में रमण करती है” और वह इसी संसार में पड़े रहते है।

 

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया विधान के पांचवे दिवस विधानाचार्य अविनाश भैय्या भोपाल एवं अनूप भैया विदिशा द्वारा भक्ती भाव के साथ संगीतकार नीलेश जैन बुडा़र की स्वर लहरियों के साथ आचार्य गुरुदेव की भक्ती करते हुये 512 अर्घ समर्पित किये गये, 19 मई रविवार को1024 अर्घ समर्पित किये जाऐंगे सोमवार 20 मई को विश्वशांति महायज्ञ होकर विश्व में शांति की भावना की जाएगी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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