धर्म करने के पहले निर्णय करना पड़ेगा। शुद्धसागर महाराज
कोटा
युवा संत पूज्य मुनि 108 श्री शुद्ध सागर महाराज ने तलवण्डी जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम व्यापार दुकान आदि प्रारम्भ करने से पहले नफे नुकसान का पूरा हिसाब लगा कर ही निर्णय करते है किंतु हम धर्म जैसी मूल्यवान क्रिया को करने से पहले हम तनिक भी विचार नही करते है।धर्म को भी हम हमारे मन को ह्रदय को जितना अच्छा लगता है उतना ही सुनना पसंद करते है।इस मूल्यवान वस्तु को हम कम आँकते है।
हम जब तन मन से सक्षम होते है तो हम संसार की क्रियाओं में धन को संग्रह करने स्वयं को खपा देते है और धर्म के लिए मात्र दिखावा करते है।जब हम तन से अक्षम हो जायेगे तब धर्म की ओर अग्रसर होंगे क्योंकि हम धर्म का मूल्य बहुत ही कम आँकते है।
हम जो धर्म कर रहे है क्या वो वास्तविक है या दुसरो की देखा देखी कर रहे है।
बिना विवेक के बिना विचार के किया गया दिखावे के धर्म भी नरक का कारण बनता है।इसलिए धर्म को करने के पहले निर्णय करो कि धर्म होता कैसे है,उसको करने का सही समय,उचित मार्ग कोनसा है ओर यह सन्मार्ग देव शास्त्र ओर गुरु की शरण मे सच्चे मन,वचन,काया से समर्पित होने पर ही प्राप्त होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
