उज्जैन शहर में प्रथम बार आचार्य विद्यासागर महाराज द्वारा रचित मूकमाटी महाकाव्य पर दिखाई गई एक टेलीफिल्म

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उज्जैन शहर में प्रथम बार आचार्य विद्यासागर महाराज द्वारा रचित मूकमाटी महाकाव्य पर दिखाई गई एक टेलीफिल्म
उज्जैन
उज्जैन नगर में प्रथम बार आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज द्वारा रचित मूकमाटी महाकाव्य पर आधारित एक टेलीफिल्म आर्यिका पूर्णमति माताजी के सानिध्य में प्रवचन सभा में दिखाई गई। फ्रीगंज के जैन मंदिर में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान माताजी संघ सानिध्य में हो रहा है। यह फिल्म एक घंटा 18 मिनट चली।
एक विवरण फिल्म पर
इस फिल्म का निर्माण जिन आगम प्रभावना क्रिएशन समिति कानपुर द्वारा किया गया है। इसकी पटकथा एवं निर्देशन प्रदीप विजय जैन ने किया है। यह फिल्म पहली बार 19 जुलाई 2019 को कानपुर में प्रदर्शित हुई थी।

 

श्री जैन के द्वारा मिली जानकारी अनुसार इससे पूर्व इसका प्रदर्शन कानपुर, छतरपुर, खुजराहो, जयपुर, आगरा, लखनऊ,गंजबासौदा, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अशोकनगर, टीकमगढ़ सहित 25 शहरों में इसका प्रदर्शन किया जा चुका है।

इस फिल्म के द्वारा माटी धरती, कुंभकार, माटी का कुंभ, स्वर्ण कलश, सूत्रधार, कंकर, मछली, लकड़ी, अग्नि देव, हीरा झारी, सेठ, सेठानी, पुत्री, नदी, बदली, मां, पुत्र, पडगाहन पुरुष जैसे पात्र ने अनुकरणीय संदेश दिया।

यदि हम मुख माटी पर चर्चा करें तो आचार्य श्री द्वारा रचित महाकाव्य पर अब तक 52 पीएचडी की जा चुकी है।


आचार्य श्री ने यह रचना अपने गुरु आचार्य ज्ञानसागर महाराज के प्रति समर्पित की है। 1 दिन गहन रात में माटी को स्वर प्राप्त हो जाता है वह धरती से अपनी वेदना व्यक्त करते हुए पूछती है यह जगत उसे तिरस्कार भाव से अंगीकार करता है। इससे नहीं है पीड़ा का कोई अंत? धरती कहती है सत्ता के खेल को समझते हुए उसे अपने आपको कुम्हार को सोपना है। वह उसे नया रूप देगा। उसे यानी माटी को रूपांतरण की पीड़ा को झेलना है। माटी ढल जाती है कंबो के रूप में तथा पाती है स्वयं को नगर सेठ के आंगन में। यह फिल्म माटी की कहानी की सीख देती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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