जहां शांति है वहां अहिंसा है मृदुमति माताजी

धर्म

जहां शांति है वहां अहिंसा है मृदु मति माताजी
दमोह
दमोह शहर के सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 मृदुमती माताजी ने स्कूल के छात्र छात्राओं को संबोधित किया। स्कूल के बच्चों ने हाथ जोड़कर संस्कृत भाषा में गुरु मां के समक्ष सामूहिक प्रार्थना की।

इस अवसर पर बोलते हुए माताजी ने अहिंसा के विषय में बोलते हुए कहा कि जहां पर शांति होती है वहां अहिंसा होती है। हिंसा हमेशा सुख छीनने वाली होती है। उन्होंने कहा कि णमोकार मंत्र में 5 पद है, 5पदों में महान व्यक्तित्व के गुणों को नमस्कार किया गया है। किसी व्यक्ति विशेष का नहीं।
शाश्वत सत्य को बोलते हुए कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति मरना नहीं चाहता,सभी जीना चाहते हैं। सुख पूर्वक जीना ही अहिंसा से ही संभव है।

पूज्य माताजी ने सीख देते हुए कहा कि पेड़ों की तरह सभी को दया व परोपकार करना चाहिए। पेड़ पौधे व जानवर बेजुबान है, बेजान नहीं। उन पर दया करो। आगे कहा कि भोजन शरीर के लिए, शरीर धर्म के लिए धर्म आत्म कल्याण के लिए होता है।

पटाखे के विषय में बोलते हुए कहा कि संकल्प पूर्वक किसी को नहीं मारना। पटाखे चलाने से पक्षी मरते हैं, प्रदूषित होता है। व्यर्थ की हिंसा से बचे। होली के त्यौहार पर गंदगी नही, चंदन लगाओ। भोजन करते समय ऐसे भाव रखें कि संसार का कोई भी अहिंसक प्राणी भूखा न रहे। 18 महा भाषाएं व 700 लघु भाषाएं होती हैं।

माताजी ने हिंदी भाषा का सम्मान करने की बात करते हुए कहा कि हमें अपनी हिंदी भाषा का सम्मान करना चाहिए। जननी जन्मभूमि के प्रति प्रेम होना चाहिए। गोमाता, सरस्वती माता के अलावा अहिंसा जगत माता हैं। अहिंसा पद्धति से ही सभी आनंद में रहते हैं। परोपकार में आनंद है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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