स्मृति का झरोखा चमत्कारजी गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी 10nov 2019पिच्छिका परिवर्तन के अंश

धर्म

स्मृति का झरोखा चमत्कारजी गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी 10nov 2019पिच्छिका परिवर्तन के अंश
पिच्छिका परिवर्तन हर्षोउल्लास के साथ हुआ पुण्य वह जो अच्छे कार्यो मे लगाता है व पाप जो अच्छे कार्यो से बचाता विशुद्धमति माताजी

चमत्कार जी
सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा स्वर्ण विशुद्ध वर्षायोग एवं चमत्कारजी प्रबन्ध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11 आर्यिका माताजी व 2 क्षुल्लिका माताजी ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह धार्मिक आयोजन के साथ जयकारों के बीच धर्म प्रभावनापूर्वक संपन्न हुआ था।
इस दौरान चमत्कारजी की पावन धरा पर भक्ति एवं संयम का अनूठा संगम दिखाई दिया था। आर्यिका संघ को संयम व वीतरागता को दर्शाने वाली नवीन पिच्छिकाएं देने एवं पुरानी लेने वालों की होड़ लग गई थी। सभागार खुशी के माहौल एवं पिच्छिका परिवर्तन के अनोखे दृश्यों से परिपूर्ण था। समारोह का शुभारम्भ आचार्य श्री निर्मलसागरजी महाराज के चित्र अनावरण एवं उनकी दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ था।

 

 

 

 

 

 

वहीं मंगलाचरण की नृत्यपूर्वक दी गई प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया था।
जैन जगत की आस्था के केन्द्र अहिंसा सर्किल आलनपुर स्थित दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कारजी में जिनेन्द्र भक्तों से खचाखच भरे विशुद्ध सभागार में झूमते-गाते हुए बारी-बारी से आर्यिका संघ को शास्त्र एवं वस्त्र भेंट किए गए थे।

इसी क्रम में संयम धारण करने वाले श्रावकजनों द्वारा संयम के प्रतीक नवीन पिच्छिकाएं संकल्पपूर्वक भेंट की गई एवं आर्यिका संघ से आशीर्वाद लेते हुए उनकी पुरानी पिच्छिकाएं श्रद्धापूर्वक ग्रहण की।


इन्हे मिला था  गुरु माँ विशुद्धमति माताजी को नवीन पिच्छिका भेट करने व पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सोभाग्य
गुरु माँ को नवीन पिच्छिका भेट करने का पुण्य मंजु देवी जैन को मिला था वह पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का पुण्य आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण व तीन प्रतिमा व्रत ग्रहण करने वाली अदिति दीदी को प्राप्त हुयी थी सभागार तब भावुक हो गया जब अल्प उम्र मे अदिति दीदी ने पिच्छिका प्राप्त करने का निवेदन किया

इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी ने कहा था की पुण्य वह है जो अच्छे कार्यो मे हमको सल्ग्न करे व पाप वह जो अच्छे कार्यो से रोके बुराई की और अग्रसर करे माताजी ने कहा व्यक्ति स्वय बनता है और बनाता है साधू अपनी साधना मे बढ़ता है उन्होने कहा षट आवश्यक साधू के भी होते है व श्रावक के के भी होते है जिनका पालन कर मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है माताजी ने कहा श्रावक अनुव्रतो का पालन करते हुये मोक्ष पद का राही बन सकता है माताजी ने कहा यह पिच्छिका परिवर्तन सभी के बीच करने का प्रयोजन यही सभी संयम पद की और अग्रसर हो और मोक्ष पद के राही बने और शास्त्र अध्यन की कोई भी लाइन कब उतर जाये और संसार से तार दे
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

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