स्वभाव से जीवन का उत्थान*श्रमण मुनि श्री विशल्यसागर जी मुनिराज*

धर्म

*स्वभाव से जीवन का उत्थान*श्रमण मुनि श्री विशल्यसागर जी मुनिराज*
रविन्द्र कीर्ति जी ने लिया मुनिश्री का आशीष
झुमरीतिलैया
कुशल व्यवहार आपके जीवन का आईना है।इसका आप जितना अधिक इस्तेमाल करेंगे आपकी चमक उतनी ही बढ़ जायेगी।चाहते हैं चमत्कार,तो अपने व्यवहार को ठीक करें,अच्छा और विन्रम व्यवहार ही आपको संसार में देगी नही पहचान,सबको प्रेम और सम्मान दीजिए यह आपकी ओर से दिये जाने वाले मंहेगे – मंहेगे तोहफो से बेश लकीमती है।

विन्रमता को जीवन में लाईये जिसमें सुंदर – सुंदर पुष्प खिल सके ,लग सके भाषा इज्जत की बोलिए जिससे हर शब्द हीरे – मोती बन सके ।श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर झुमरी तिलैया ( कोडरमा ) में विराजमान प. पू. श्रमण मुनि श्री विशल्यसागर जी मुनिराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि

समय का मूल्य पहचानीये। सार्थक कामों में खर्च किया गया समय तिजोरी में सुरक्षित हो जाता है,वहीं बातों और गप्पों में हाँका गया समय कूड़ेदान में चला जाता है उदासी को जीतिए,नहीं तो आप संसार के सुंदर उपवन में चिंता ,तनाव और अवसाद के कांटों से भरे हुये बबूल भर बनकर रह जायेगे

।प्रलय आने पर समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़ देता है ,पर सज्जन लोग महाविपत्ति आने पर भी मर्यादा नहीं छोड़ते।

 

 

 

पू. गुरुदेव के दर्शन हेतु आज हस्तिनापुर (उत्तरांचल) से आये ओर जैन तीर्थंकर के जन्म स्थली को विकास करने में अपना पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले स्वामी रविन्द्र कीर्ति जी ने गुरूवर के चरणों मे
श्रीफल समर्पित किया ओर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नवीन जैन और राज कुमार अजमेरा से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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