भगवान सिद्ध की आराधना में बह रही भक्ति की बयार जाप अनुष्ठान के साथ इंद्र इंद्राणी अर्पित कर रहे हैं अर्घ्य तप और संयम तपस्वीयों के लिए तीन लोक की सबसे बड़ी संपदा मुनि भाव सागर महाराज*

धर्म

भगवान सिद्ध की आराधना में बह रही भक्ति की बयार जाप अनुष्ठान के साथ इंद्र इंद्राणी अर्पित कर रहे हैं अर्घ्य तप और संयम तपस्वीयों के लिए तीन लोक की सबसे बड़ी संपदा मुनि भाव सागर महाराज*

 

भोपाल
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज अनंत सागर महाराज धर्म सागर महाराज भाव सागर महाराज के सानिध्य में नो दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान विश्व शांति महायज्ञ में श्रद्धा भक्ति और आस्था का अभूत पूर्व संगम दिखाई दे रहा है सुबह से ही आयोजन स्थल पर विधान के प्रमुख पात्र एवं इंद्र इंद्राणी का तांता लग जाता है प्रातः भगवान जन्म के अभिषेक और मंत्र उच्चारित शांति धारा के साथ जाप अनुष्ठान प्रारंभ हो जाते हैं दिगंबर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज बांगा ने बताया विधान आचार्य नितिन भैया खुरई एवं अविनाश भैया के निर्देशन में धार्मिक क्रियाएं हो रही है मंदिर परिसर में भगवान के समवशरण की भव्य रचना एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान का मंडल सजाया गया है जिस पर श्रीफल एवं अष्टद्रव्य समर्पित कर भगवान सिद्धकी अनंत गुणों की आराधना की जा रही है।

 

 

तप में तपकर आत्मा कुदंन बन जाती है मुनि श्री भावसाग़र जी
अपने आशीर्वचन में मुनि श्रीभाव सागर महाराज ने कहा तप में तप कर आत्मा कुंदन बन जाती है जैसे अग्नि में तप कर स्वर्ण और निखर जाता है। अध्यात्म में तप क्रिया वैरागी के लिए मोक्ष मार्ग का सेतु है। तप और संयम तपस्वीओ के लिए तीन लोक की सबसे बड़ी संपदा है।

इस मौके पर ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज बांगा मनोज आर एम नरेंद्र वंदना पंकज सुपारी सहित अनेक धर्मावलंबी मौजूद थे 25 सितंबर को अनुष्ठान का समापन विश्व शांति महायज्ञ के साथ होगा *

अंशुल जैन प्रवक्ता से प्रवक्ता से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *