दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी। 

धर्म

दूसरो को पीड़ा दुख देने से कर्मों के उदय होने पर व्यक्ति भी शोक और दुखी होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी। 
ऋषभदेव।पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्री ऋषभदेव केसरिया जी में विराजित हैं।शोक दुःख किन कारणों से होता है इसकी विवेचना में आचार्य श्री ने बताया जो मनुष् शोकसे दग्ध हुए मनुष्यों को देखकर संतुष्ट होता है, अथवा जो मनुष्य किसी द्वेषबुद्धिसे अन्य जीवोंको दुःख देता है, अथवा जो मनुष्य अपने हृदयमें किसीके साथ वैर विरोध कर संतुष्ट होता है। वह मनुष्य इन कार्यों के करने के अनंतर अथवा मरने के बाद शोक को प्राप्त होता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने ऋषभदेव गुरुकुल में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की।ब्रह्मचारी गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया योगेश गंगावत अनुसार प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के प्रभावक शिष्य आचार्य श्री कुंथुसागर जी के ग्रंथ भावत्रयफल प्रदेर्शी के दिव्तीय श्लोक की विवेचना में आचार्य श्री ने आगे बताया कि मनुष्योंको जो शोक वा संताप होता है वह असाता वेदनीय कर्म के उदयसे होता है। तथा असाता वेदनीय कर्म का आस्रव स्वयं शोक संताप करने से होता है अथवा दूसरोंको शोक संताप उत्पन्न करनेसे होता है अथवा स्वयं शोक संताप करने और दूसरों को भी शोक संताप उत्पन्न करने से होता है। जब यह जीव मनुष्य किसी जीव को शोक से व अन्य किसी प्रकार के दुःखसे अत्यंत दुःखी देखकर प्रसन्न होता है व स्वयं किसी को दुःख देकर व मारकर अथवा अन्य जीवों की किसी भी प्रकारकी हानि करके प्रसन्न होता है अथवा किसी के साथ वैर-विरोध करके प्रसन्न होता है तब उस जीवके असाता वेदनीयकर्म का आस्रव होता है। उस आस्रवके अनंतर समयमें उन आए हुए असाता वेदनीय कर्मों का बंध हो जाता है और वह बंध को प्राप्त हुआ कर्म जब उदयमें आता है तब उस कर्म के उदय से उस जीवको अत्यंत शोक और संताप उत्पन्न होता है। यही समझकर प्रत्येक जीवको किसी जीवको सताना नहीं चाहिये, किसी जीवको किसी प्रकारका दुःख नहीं देना चाहिए।पंच कल्याणक प्रतिष्ठा समिति अध्यक्ष सेठ राजमल कोठारी गुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदरलाल भाणावत ,उपाध्यक्ष सुरेश कोठारी प्रतिष्ठा समिति के महामंत्री प्रकाश भाणावत दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र वालावत,प्रदीप गनोंदिया महामंत्री अनुसार वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य सुधीर शास्त्री के निर्देशन में 11 फरवरी से 15 फरवरी तक नूतन चौबीसी प्रतिमाओ का पंच कल्याणक होगा। आगुंतक अतिथियों के लिए समुचित व्यवस्था की गई हैं।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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