पाषाण,धातु,रत्न की प्रतिमाओं में गुणों का आरोपण कर पूज्यनीय बनाया जाता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पाषाण,धातु,रत्न की प्रतिमाओं में गुणों का आरोपण कर पूज्यनीय बनाया जाता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी प्रतापगढ़ हमने आपने तीर्थंकर नहीं देखे हैं हो सकता है कि कुछ प्राणी पूर्व जन्म में उस समय रहे हो। तीर्थंकर के बताएं मार्ग पर आज दिगंबर गुरुजन मिल रहे हैं यह गुरु आचार्य श्री शांति सागर जी की […]
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