जल – कल और प्रकृति है तो सब कुछ है, अन्यथःसब कुछ होकर भी हम भिखारी और दरिद्री हैं..! प्रसन्न सागर महाराज

धर्म

जल – कल और प्रकृति है तो सब कुछ है, अन्यथःसब कुछ होकर भी हम भिखारी और दरिद्री हैं..! प्रसन्न सागर महाराज
नैनीताल
अन्तर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागरजी महाराज की कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा चल रही है नैनीताल की हसीन वादियों में राणी बाग में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि जल – कल और प्रकृति है तो सब कुछ है, अन्यथःसब कुछ होकर भी हम भिखारी और दरिद्री हैं..!

 

महाराज श्री ने कहा जल कीबर्बादी, प्रकृति यानि वनस्पति का नुकसान, और कल यानि समय की बर्बादी की दिशा में ले जायेगी।

उन्होंने कहा हम संघ सहित विशाल रामगंगा नदी के ब्रिज से गुजर रहे थे। जैसी विशाल नदी थी, उतनी दीन हीन रूखी सूखी दिख रही थी। दूर दूर तक पानी कम होता नजर आ रहा था। हमने कहा – यदि ऐसा ही हाल रहा तो अपना देश जल के लिये दु:खी परेशान रहेगा। जैन साधु जल का जितना सम्मान करता है, यदि 10 परसेंट आम आदमी जल का सदुपयोग सम्मान करने लग जाये तो हम जल के संकट से कल बच पायेंगे अन्यथः बहुत कठिन दौर आ सकता है। देश की सरकारें नदियों के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेकिन इस पर जन जन को, हर एक इन्सान को भी ध्यान देना होगा, क्योंकि समुची देश की नदियां दुर्दशा ग्रस्त है। जिस गति से जल प्रवाहों और सरोवरों को हम सूखता पा रहे हैं, उसी स्तर से भूजल में भी गिरावट दर्ज हो रही है। आंकड़े बताते हैं 1960 में समूचे देश में 30 लाख ट्यूबवेल थे। 2010 तक तीन करोड़ तक पहुंच चुकी थी। आज कितनी है पता नहीं-? कहने का मतलब है कि प्रकृति हमें चेता रही है।

हमें अपनी रोजमर्रा की आदतों के साथ जल – कल और प्रकृति के व्यर्थ की बर्बादी से बचना और बचाना ही होगा। जीवन के लिए पानी बहुत ज़रूरी है। जल का उपयोग एक कन्जूस धनपति की तरह करना होगा। क्योंकि — पानी बनाया नहीं जा सकता लेकिन बचाया जा सकता है।

दादी मां ने – पानी को नदी में देखा,, पिता जी ने – कुएं में पानी देखा,, हमने आपने – नल में पानी देखा,, आज के बच्चे – बोतल में पानी देख रहे हैं और अब उनके बच्चे किसमें पानी देखेंगे—?

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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