निर्यापक श्रमण अभय सागर महाराज सानिध्य में आचार्य समय सागर महाराज का प्रथम आचार्य पद पदारोहण महोत्सव मनाया

धर्म

निर्यापक श्रमण अभय सागर महाराज सानिध्य में आचार्य समय सागर महाराज का प्रथम आचार्य पद पदारोहण महोत्सव मनाया गया
दमोह
दिगंबर जैन धर्मशाला में विराजमान निर्यापक मुनि श्री108 अभय सागर जी महाराज के ससंघ मंगल सानिध्य में पट्टाचार्य समय सागर जी महाराज का प्रथम आचार्य पद पदारोहण महोत्सव अति उत्साह पूर्वक ब्रह्मचारी अंकित भैया के निर्देशन में मनाया गया।

 

दिगंबर जैन धर्मशाला में प्रातः काल मुनि संघ के मंगल सानिध्य में श्रीजी का सामूहिक महा अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई इंद्र बनाकर प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य आनंद लैब डॉक्टर गौरव नायक आनंद बीएसएनल ग्रीस इटोरिया रूपचंद जैन परिवार को प्राप्त हुआ जबकि शांति धारा करने का सौभाग्य सुनीता जैन अशोक कमर्शियल श्रेयांश लहरी गिरीश नायक सचिइंद्र जैन जिनेंद्र मंडला एवं संजीव शाकाहारी के परिवार को प्राप्त हुआ इसके पश्चात आचार्य छत्तीसी मंडल विधान संपन्न हुआ विधान उपरांत मुनि श्री के मंगल प्रवचन के पूर्व अभय बनगांव संतोष सिंघई एवं तहसीलदार मोहित जैन ने शास्त्र भेंट किया दिगंबर जैन पंचायत महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति जैन मिलन नगर शाखा एवं नन्हे मंदिर कमेटी के पदाधिकारी ने महावीर जयंती हेतु मुनि संघ को श्रीफल अर्पित किए।   

 

गुरुदेव ने हम पर अनेक उपकार किए उनके उपकारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता चंद्रसागर महाराज
इस अवसर पर मुनि श्री चंद्र सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि आत्मा मैं सम्यक दर्शन ज्ञान और चरित्र के रूप में तीन रत्न होते हैं जो इन्हें जान लेता है उसे संसार में रूलना नहीं पड़ता वह संसार से पार हो जाता है गुरुदेव हमें संसार से पार लगाते हैं गुरुदेव ने हम पर बहुत उपकार किए हैं उनके उपकारों को कभी नहीं भुलाया जा सकता गुरुदेव ने हमें आचार्य समय सागर जी के रूप में साधु परमेष्ठी उपाध्याय परमेष्ठी और आचार्य परमेष्ठी प्रदान किए हैं।

 

इसके पश्चात निर्यापक मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने कहा कि गुरुदेव ने संलेखना पूर्वक अपने आचार्य पद को त्याग कर हमें समय सागर जी महाराज के रूप में आचार्य परमेष्ठी देने के संकेत बहुत पूर्व में ही दे दिए थे आचार्य भगवान ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा राजस्थान की मरुभूमि से प्रारंभ करके बुंदेलखंड की इस उर्वरा भूमि में अनेक रतन को प्रदान किया जिनकी चमक से आज मानव मात्र आध्यात्मिक ऊर्जा को प्राप्त कर रहा है

             

 

उन्होंने अपने जीवन काल में 508 दीक्षाएं प्रदान की दीक्षाएं ज्ञान वैराग्य की पुष्टि कर कर्मों की निर्जरा में सहायक होती है बड़े बाबा की सन्निधि में आचार्य श्री ने अनेक दीक्षाएं दी और उनके ही छत्रछाया में नवाचार पूज्य समय सागर जी महाराज को हम सभी साधुगण ने उच्च शासन पर विराजमान किया हम पर उनकी छत्रछाया बनी रहे और इसी तरह जिन शासन उन्नति को प्राप्त होता रहे यही हम सब की भावना है।

     
सुनील जैन वेजिटेरियन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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