एक न एक दिन तो यह शरीर को अपना साथ छोड़ना है यही भावना प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा ध्यान रखना चाहिये,तभी उनका जीवन सार्थक होगा”निर्वेग सागर महाराज
भोपाल
“जंहा देह अपनी नहीं, तंहा न अपना कोय”एक न एक दिन तो यह शरीर को अपना साथ छोड़ना है यही भावना प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा ध्यान रखना चाहिये,तभी उनका जीवन सार्थक होगा” उपरोक्त उदगार निर्वेगसागर महाराज ने वर्धमान नगर भोपाल में व्यक्त किये।
सौ रोगों की एक दवा पैदल चलने का अभ्यास रखना चाहिये,मुनि श्री ने कहा कि संपूर्ण भारत में श्रमण परंपरा को जीवंत रखने वाले आचार्य शांति सागर महाराज हुये जिन्होंने उपसर्ग और संकटों को सहते हुये भारत के विभिन्न प्रांतों में पद विहार किया तथा धर्मप्रभावना की,उन्होंने 35 वर्ष की मुनि अवस्था में लगभग साढ़े 27 वर्ष तो उनके उपवास में ही व्यतीत हुये लगभग 9938 उपवास किये तथा कुंथलगिरी से इस नश्वर देह का त्याग किया इसी परंपरा में आचार्य ज्ञानसागर महाराज हुये तथा आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज हुये मुनि श्री कहा कि आचार्य श्री ने अपने जीवन काल में राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर ऐसे ऐसे कार्य किये जिससे अकेला भारत ही नहीं सारा विश्व प्रभावित हुआ।आचार्य श्री की दृष्टि हमेशा अपनी आत्मा पर ही लगी रहती थी उनका शरीर के प्रति कोई मोह नहीं था तभी तो उन्होंने कयी रसों का परित्याग करते हुये अनेक प्रकार की कठिन साधना कर निरीह वृति का परिचय दिया।

संत हृदय नवनीत समाना का उदाहरण देते हुये कहा कि जब राजस्थान में अकाल पड़ रहा था तो संत का हृदय पिघल गया और उन्होंने ब्रहम्चारियो को संकेत दिया और लगभग एक हजार पशुओं को मध्यप्रदेश में विशेष ट्रेन के माध्यम से बुलवा लिया। आज दयोदय महासंघ के माध्यम से जीव दया के क्षेत्र में देश भर में लगभग 150 से अधिक गौ शालाऐं कार्यरत है जिसमें लाखों पशुओं का संरक्षण हो रहा है। बडो़ के प्रति बहुमान केसे रखा जाता है यह आचार्य श्री समय सागर जी महाराज से सीखना चाहिये।

गुरुओं का उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकता गुरु की कृपा हम सभी के ऊपर है।आज हम सभी का उत्तरदायित्व है कि आचार्य श्री के सभी उपक्रमों पर ध्यान रखना चाहिये। आचार्य श्री समय सागर महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस पर मुनि श्री ने कहा कि आज के दिन पैदल चलने का अभ्यास करना चाहिये।

भारतीय संस्कृति अतिथि देवो भवःकी रही है संधानसागर महाराज
इस अवसर पर मुनि श्री 108 संधानसागर महाराज ने कहा कि भारत की संस्कृति वह संस्कृति है जहा रुखी सूखी खाकर भी भगवान को घी का दीपक लगाते है भारतीय संस्कृति अतिथि देवो भवःकी रही है
इस अवसर पर क्षुल्लक आदर सागर महाराज ने भी संबोधित किया। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया रविवार को मुनिसंघ के सानिध्य में मंदिर का शिलान्यास एवं मुनि श्री की देशना वर्धमान नगर में होगी तथा 11 बजे से दयोदय महासंघ का राष्ट्रीय अधिवेशन रखा गया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
