बच्चो को छोटी उम्र मे संस्कारित करने का काम बढ़ो को करना चाहिए विमल सागर महाराज
बंडा
मंगलधाम में हो रहे भव्य सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत अपने मांगलिक उद्बोधन मी मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने विशाल धर्मसभा मे संस्कारों के विषय पर प्रकाश डाला उन्होने भारतीय जीवन मे संस्कारों काबड़ा महत्व बताते हुए कहा की कोई भी राष्ट्र के रहन-सहन, वेशभूषा, खानपान, कला कौशल, संगीत आदि का अन्तर्भाव हो जाता है। व जो भी राष्ट्र, धार्मिक संस्कार को अपना लेता है वह राष्ट्र की प्रगति में सहायक हो जाता है। उन्होने इस बात पर भी ज़ोर दिया की बच्चों को छोटी सी उम्र से ही संस्कारित बनाने का काम प्रत्येक माता-पिता को करना चाहिए।
उन्होने जोर देते कहा कीसवाल इस बात का नहीं है कि हम कितना जीवन जिए, सवाल तो केवल इस बात का है कि हमने कैसा जीवन जिया। भारतीय संस्कृति को अपनाने से ही हमारा उत्थान हो सकता है। संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। उन्होने यहाँ तक कहा की पाश्चात्य संस्कृति ने हम सबको पशु सा बना दिया है। जिससे अनैतिक आचरण करने के लिए खुली छूट हो गयी है। इस पर अंकुश लगना नितांत आव्श्यक है।
मुनिश्री आगे कहा कि समस्त जगत में धर्म और अध्यात्म का संदेश देने वाला भारत देश विश्व गुरु, जगत गुरु के नाम से जाना जाता है। लेकिन भारत की दयनीय दशा उसके द्वारा अपनी संस्कृति को छोड़ने से हुई हैं। मुनि श्री ने विशेष रूप से कहा की विदेशी संस्कारों से बचकरव शुद्ध भारतीय संस्कारों को जीवित रखने से ही हमारे समाज, हमारे राष्ट्र का कल्याण संभव हो सकता है। आज संस्कार के अभाव में अमन-चैन सुख शांति सब समाप्त हो रही हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
