परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी के पावन सानिध्य में नेनवा के आदिनाथ जिनालय में समाज की 300 महिलाओं ने महिला सेमिनार में भाग लेकर धर्म प्रभावना बढ़ाई

व्यक्ति किताबों के ज्ञान से महान नहीं होता वह तो व्यवहारिकता वह नैतिकता से महान बनता है विज्ञाश्री

जयपुर/
परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी के पावन सानिध्य में श्री अग्रवाल आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नैनवा में महिला समिनार के अंतर्गत महिलाओं को मर्यादा पति परायणता , एवं पारस्पारिक व्यवहारिकता की शिक्षा देते हुए गुरु मां ने कहा कि आज मर्यादा का घुंघट उतारकर नारी फैशन शो जैसे आयोजनों में भाग लेना चाहती है, मिस वर्ड बनना चाहती है, स्वतंत्र होना चाहती है पश्चिमी तर्ज पर , मैं भारतीय नारियों से निवेदन कर रही हूं की उन्नति के शिखरों पर अपनी देह का विज्ञापन करके नहीं नारी की आंखों में प्रेम की ज्योति जलती रहनी चाहिए ,,हृदय मैं प्रेम का सागर हिलोरें मारता रहता है जिसके हाथ दान और सेवा से कृतार्थ होते हैं जो अपमान तिरस्कार और कड़वाहट पीकर सम्मान सत्कार और मधुरता का अमृत बरसाती है वह नारी पति परायण बनकर घर को स्वर्ग बना सकती है | सागर की भी मर्यादा है मर्यादा छोड़ते हैं तो दुनिया को डूबाता हैं यदि आप मर्यादा छोड़ोगे तो स्वयं डूबोगे और दूसरो को भी डूबाओगे अपने हाथो में मेहंदी के साथ, साथ मेहनत की मेंहदी लगाओ तो जीवन रंगीला होगा | व्यक्ति किताबो के ज्ञान से महान नही होता वह तो व्यावहारिकता व नैतिकता से महान बनता है | आज की शिक्षा धन कमाने का साधन तो हो सकती है पर संस्कार विहिन होने से पशु के समान है | आज के बच्चो की जिंदगी सुधारनें के लिए उनकी संगति पर ध्यान दें एवं उन्हें मोबाइल और नेट से दूर रखें आज की पीढ़ी का पतन स्वछन्दता के कारण हो रहा है अपने बच्चों को स्वतंत्र तो बनाया लेकिन स्वछन्दता ज्यादा हो गई,

अतः आज के माता-पिता का प्रथम कर्तव्य है बच्चों पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम में
समाज की लगभग 300 महिलाओं ने महिला सेमिनार में भाग लेकर धर्म प्रभावना बढ़ाई है।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान
