*विकारों की सफाई ही सच्ची सफाई, सद्गुणों की कमाई ही सच्ची कमाई : आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज*
नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।
गुरुदेव ने कहा धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं को ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मान लेना मनुष्य की सबसे बड़ी भूल है। वास्तविक संपत्ति न तो सोना-चाँदी है और न ही ऊँचे महल व अपार धन-संपदा, बल्कि मन की निर्मलता, विचारों की पवित्रता और जीवन में अपनाए गए सद्गुण ही मनुष्य की असली पूँजी हैं।
जीवन में सच्ची सफाई बाहरी धूल-मिट्टी को हटाने से नहीं, बल्कि मन में बसे क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या और अहंकार जैसे विकारों को दूर करने से होती है। इसी प्रकार सच्ची कमाई बैंक बैलेंस बढ़ाने में नहीं, बल्कि दया, क्षमा, करुणा, संतोष, संयम और विनम्रता जैसे सद्गुणों को अपने जीवन में संचित करने में है।
आज मनुष्य धन-दौलत के नाम पर जीवनभर संग्रह करता रहता है, लेकिन यह भूल जाता है कि संसार की सारी संपत्ति यहीं रह जानी है। वास्तव में जिसने अपने भीतर के विकारों को त्याग दिया, जिसने इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर ली और जिसने आत्मकल्याण का मार्ग चुन लिया, वही सच्चे अर्थों में धनवान है।

भगवान महावीर स्वामी का जीवन इसी परम सत्य का उदाहरण है। उन्होंने राजसी वैभव, सुख-सुविधाओं और समस्त सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मज्ञान और मोक्षमार्ग को अपनाया। उनका संदेश हमें सिखाता है कि पाने की दौड़ में नहीं, बल्कि छोड़ने की भावना में जीवन की वास्तविक महानता छिपी है।
इसलिए जीवन में संग्रह की नहीं, त्याग की भावना विकसित करें। दूसरों की कमियाँ खोजने से पहले अपने विकारों को पहचानें और धन कमाने के साथ-साथ सद्गुण कमाने का भी प्रयास करें।

क्योंकि अंततः पहचान धन-दौलत से नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और आत्मा की निर्मलता से बनती है। असली दौलत वही है, जो आत्मा को समृद्ध बनाए और जीवन को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करे।
माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


