आचार्य वर्धमान सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में मनाया गया केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव

धर्म

आचार्य वर्धमान सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में मनाया गया केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव –

श्री महावीरजी
रविवार को आचार्य वर्धमान सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव में केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया गया।

 

इस पुनीत बेला में प्रातः तीर्थंकर महामुनि की आहार चर्या हुई वहीं समवशरण में भगवान की दिव्य ध्वनि खिरी तथा दिव्यदेशना के माध्यम से जीवों के कल्याण का उपदेश दिया।

 

 

 

 

केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव के अन्तर्गत रविवार को प्रातः 6.30 बजे से ध्यान एवं आशीर्वाद सभा के बाद श्री

जिनाभिषेक एवं नित्यार्चना की गई। तत्पश्चात प्रातः तीर्थंकर महामुनि की आहार चर्या हुई जिसमें महामुनि को आहार देने के लिए श्रद्वालुओं में होड़ मच गई।हर कोई इस पावन मौके का पुण्यार्जन लेना चाह रहा था।

 

तत्पश्चात पंचाश्चर्य दृश्य के बाद आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने प्रतिमाओं में केवलज्ञान संस्कार देते हुए सूरिमंत्र दिया । नव स्थापित भगवान महावीर की 24 फीट उंतग खड्गासन प्रतिमा एवं प्रतिष्ठित होने वाली नवनिर्मित चौबीसी प्रतिमाओं में भी केवल ज्ञान की क्रियाएं की गई तथा सूरिमंत्र दिया गया।
प्रचार संयोजक विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि प्रातः 10 बजे राजा श्रेणिक के जुलूस का धूमधाम से बैण्ड बाजों, हाथी, घोड़ों सहित पूर्ण लवाजमे के साथ समवशरण में आगमन हुआ। समवशरण का उदघाटन के बाद तीर्थंकर महावीर के रूप में आचार्य वर्धमान सागर महाराज समवशरण में विराजमान हुए। भगवान के मुख्य गणधर गौतम स्वामी के आगमन पर भगवान की दिव्य ध्वनि खिरी तथा उन्होंने अपनी दिव्य देशना के माध्यम से जीवों के कल्याण तथा जीओ और जीने दो का उपदेश दिया। सौधर्म इन्द्र रोहन -अमिता कटारिया, चक्रवर्ती राजा सुरेश -शान्ता पाटनी आदि सभी इन्द्र-इन्द्राणियों ने आचार्य श्री से मार्गदर्शन लेकर अपनी जिज्ञासाएं शान्त की।

तत्पश्चात दोपहर 12.15 बजे से महामस्तकाभिषेक महोत्सव शुरु हुआ। जिसके लिए प्रथम अभिषेक का पुण्यार्जक पूरा आर के मार्बल्स किशनगढ परिवार गाजे बाजे से नाचते गाते मंदिर प्रांगण पहुचा।

पं.हंसमुंख जैन धरियावद वालों द्वारा शास्त्र सभा में धर्म का मर्म समझाया।
रात्रि में रंगशाला नाट्य अकादमी इन्दौर द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। जिसमें भगवान नेमिनाथ के जीवन पर आधारित वैभव और वैराग्य की गाथा ‘विरह और वैराग्य ‘ नाटिका की मनभावन प्रस्तुति दी गई ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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