देहदान कर दुनिया से विदा होकर भी दो आंखों में छोड़ गए नई रोशनी … प्रेमचंद जी धूपिया का नेत्रदान , देहदान बना मानवता की अमिट मिसाल

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देहदान कर दुनिया से विदा होकर भी दो आंखों में छोड़ गए नई रोशनी… प्रेमचंद जी धूपिया का नेत्रदान बना मानवता की अमिट मिसाल

रामगंजमंडी

 

पत्रकार मनीष जैन, महावीर एवं लोकेश धूपिया के पूज्य पिताश्री का निधन, अंतिम विदाई से पहले ही कर गए ऐसा पुनीत कार्य, जो दूसरों के जीवन में हमेशा उजाला बनकर रहेगा

 

कुछ लोग दुनिया से विदा होने के बाद भी अपने कर्मों से हमेशा जीवित रहते हैं। उनका शरीर भले ही इस संसार में नहीं रहता, लेकिन उनके विचार, संस्कार और परोपकार के कार्य उन्हें लोगों के दिलों में अमर बना देते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत कर गए स्वर्गीय श्री प्रेमचंद जी धूपिया।

 

अत्यंत दुःख एवं भारी मन से सूचित करना पड़ रहा है कि पत्रकार मनीष जैन, महावीर एवं लोकेश धूपिया के पूज्य पिताश्री श्री प्रेमचंद जी धूपिया का मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को रात्रि 1 बजे देवलोकगमन हो गया। उनके निधन से धूपिया परिवार सहित रिश्तेदारों, मित्रों एवं शुभचिंतकों में शोक की लहर छा गई। परिवार ने अपने एक आदरणीय सदस्य को खो दिया, वहीं समाज ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खोया, जिनकी स्मृतियां सदैव लोगों के हृदय में बनी रहेंगी।

 

अंतिम सांसों के बाद भी मानवता के नाम कर गए सबसे अनमोल उपहार

 

स्वर्गीय प्रेमचंद जी धूपिया की विदाई केवल एक परिवार के लिए शोक का अवसर नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी बन गई। उनके निधन के पश्चात परिवारजनों ने उनके नेत्रों का रात्रि में ही दान करवाया। अब उनकी देह एवम आंखें किसी जरूरतमंद की अंधेरी दुनिया में रोशनी का माध्यम बन सकेंगी।

 

सोचिए, जिस व्यक्ति ने इस संसार को अलविदा कह दिया, उसकी आंखों से कोई दूसरा व्यक्ति फिर से इस खूबसूरत दुनिया को देख सकेगा। इससे बड़ा परोपकार और मानव सेवा का उदाहरण भला क्या हो सकता है!

 

बताया गया कि स्वर्गीय प्रेमचंद जी की देहदान करने की भी प्रबल इच्छा थी। इस संबंध में परिवार के अन्य सदस्यों के पहुंचने पर आपसी विचार-विमर्श के बाद आगे परिवार जन ने इसकी स्वीकृति प्रदान की।

 

मृत्यु के बाद भी जीवन को सार्थक कर गया एक नेक संकल्प

 

जीवन में धन-दौलत, पद और प्रतिष्ठा पीछे छूट जाते हैं, लेकिन इंसान के अच्छे कर्म हमेशा याद किए जाते हैं। नेत्रदान का यह निर्णय समाज को बताता है कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में खुशियां लौटाई जा सकती हैं।

 

प्रेमचंद जी धूपिया का देहदान नेत्रदान केवल दो आंखों का दान नहीं, बल्कि किसी के सपनों को फिर से देखने का अवसर, किसी परिवार की उम्मीद और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

 

आज धूपिया परिवार की आंखें नम हैं, लेकिन उनके इस पुनीत कार्य से किसी अन्य की जिंदगी में उजाला आने की उम्मीद है। यही वह पुण्य है, जो किसी इंसान को उसके जाने के बाद भी यादगार बना देता है।

 

 

 

परमपिता परमात्मा दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा पत्रकार मनीष जैन सहित समस्त धूपिया परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

 

ॐ शांति! शांति!! शांति!!!

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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