मां के चरणों में संस्कारों की विरासत… आरके मार्बल परिवार की मातृशक्ति चतुर देवी जी की स्मृतियों में भावुक कर देने वाली तस्वीर
जो शोक से रहित हो, वही होता है ‘अशोक’… मां के चरणों में बैठकर मिला संस्कारों और आशीर्वाद का यह अनमोल खजाना।
कुछ तस्वीरें केवल तस्वीरें नहीं होतीं, वे अपने भीतर भावनाओं, संस्कारों और जीवन की अनमोल यादों का पूरा संसार समेटे रहती हैं। ऐसी ही एक भावपूर्ण तस्वीर आरके मार्बल परिवार की पूज्य माताश्री चतुर देवी जी की है, जिसमें अशोक पाटनी जी एवं सुरेश पाटनी जी अपनी माताश्री के चरणों में बैठे नजर आ रहे हैं।
यह दृश्य भारतीय पारिवारिक संस्कारों की उस सुंदर परंपरा को दर्शाता है, जहां जीवन में कितनी भी ऊंचाइयां हासिल कर ली जाएं, लेकिन मां के चरणों से बड़ा कोई स्थान नहीं होता। मां का आशीर्वाद ही संतान की सबसे बड़ी शक्ति और जीवन की सबसे अनमोल पूंजी होता है।


अशोक’ नाम में छिपा है गहरा जीवन दर्शन
अशोक का अर्थ होता है शोक से रहित। इस तस्वीर को देखकर नाम और भाव का एक सुंदर संयोग भी सामने आता है। मां की ममता, उनका स्नेह और उनके दिए संस्कार जीवन के हर दुख में संबल बनते हैं। मां का आशीर्वाद वह शक्ति है, जो संतान को हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का हौसला देता है।


आज पूज्य माताश्री चतुर देवी जी भले ही भौतिक रूप से इस संसार में हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां, संस्कार और जीवन में दिए गए मूल्य सदैव परिवार के साथ रहेंगे। मां का जाना जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ जाता है, जिसे कोई दूसरा कभी भर नहीं सकता।



यह तस्वीर आने वाली पीढ़ियों को भी एक संदेश देती है कि परिवार की असली संपत्ति केवल धन, प्रतिष्ठा और वैभव नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान, संस्कार और उनका आशीर्वाद है।
माताश्री के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन। उनकी पावन स्मृतियां सदैव हृदय में जीवित रहें।
मां की ममता का कोई विकल्प नहीं होता, मां चली जाती है, लेकिन उसके संस्कार कभी विदा नहीं होते।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
