स्वार्थ से सेवा की ओर समाज को नई दिशा कौन देगा? स्वयं से शुरुआत करें : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी
“युवा की ऊर्जा और महिलाओं की करुणा से आएगी सामाजिक बदलाव की क्रांति”; बोले आचार्यश्री- मंदिर में घंटा बजाना आसान, किसी अनजान मरीज को रक्तदान करना भी सच्ची पूजा
/पुष्पगिरी तीर्थ (सोनकच्छ)।
आज समाज में सब कुछ होते हुए भी संतोष की कमी दिखाई दे रही है। घर बड़े होते जा रहे हैं, लेकिन दिल छोटे होते जा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण बढ़ता हुआ स्वार्थ और घटती हुई संवेदनशीलता है। समाज को नई दिशा देने के लिए किसी मसीहा की प्रतीक्षा मत कीजिए, अपने भीतर सेवा का भाव जगाइए, बदलाव स्वयं शुरू हो जाएगा। यह प्रेरक संदेश व्रत चक्रवर्ती पट्ट विभूषण अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने पुष्पगिरी तीर्थ में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए दिया।
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागरजी महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं। उनके पावन सानिध्य में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में आचार्यश्री ने समाज में बढ़ते स्वार्थ, मानवीय संवेदनाओं में आती कमी, सेवा के महत्व तथा युवा एवं महिलाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।


बढ़ता स्वार्थ और घटती संवेदनशीलता समाज के लिए चिंता
आचार्यश्री ने कहा कि अपने हितों के साथ दूसरों की जरूरतों का ध्यान रखना ही सच्ची संवेदनशीलता है। पहले लोग पूछते थे कि गांव में सब ठीक है न, लेकिन आज पूछते हैं कि मेरा काम हो गया न? स्वार्थ ने मनुष्य को ‘मैं’ तक सीमित कर दिया है। व्हाट्सएप पर 500 दोस्त हैं, लेकिन पड़ोस में कोई बीमार है तो हमें पता तक नहीं चलता।


उन्होंने कहा कि अपनी तरक्की करना गलत नहीं है, लेकिन यह भी देखते रहना चाहिए कि हमारी तरक्की से किसी दूसरे का नुकसान तो नहीं हो रहा। अपनी खुशियों में दूसरों की खुशियों का और अपने स्वार्थ में थोड़ा परमार्थ का भाव जोड़िए। यही संवेदनशील समाज की पहली पहचान है।



अगरबत्ती घुमाना ही धर्म नहीं, किसी के जीवन में दीप जलाना भी धर्म
सेवा के वास्तविक स्वरूप को समझाते हुए आचार्यश्री ने कहा कि मानव सेवा, जीवदया और परोपकार ही धर्म की वास्तविक भावना को प्रकट करते हैं। धर्म केवल अगरबत्ती घुमाने का नाम नहीं, बल्कि किसी के अंधकारमय जीवन में आशा का दीप जलाने का नाम है। मंदिर में घंटा बजाना आसान है, लेकिन अस्पताल में किसी अनजान मरीज को रक्तदान करना भी सच्ची पूजा है। मानव सेवा सबसे बड़ी सेवा है, क्योंकि इंसान में ही भगवान का वास है।
युवा की ऊर्जा और महिलाओं की करुणा बदल सकती है समाज की तस्वीर
आचार्यश्री ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी क्षमता युवाओं और महिलाओं में है। युवा के पास ऊर्जा है और महिलाओं के पास करुणा। जब ऊर्जा और करुणा का मिलन होता है, तभी सामाजिक क्रांति आती है।
उन्होंने कहा कि युवा नशे और भटकाव से दूर रहकर अपनी ऊर्जा सेवा, शिक्षा और समाज निर्माण में लगाएं। महिलाएं अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यदि युवा और महिलाएं जागृत हो जाएं तो गांव से लेकर शहर तक सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। युवा समाज की शक्ति हैं और महिलाएं उसकी संवेदना हैं। दोनों की सक्रिय भागीदारी से समाज की दिशा और दशा बदल सकती है।
बदलाव की शुरुआत दूसरों से नहीं, स्वयं से करें
आचार्यश्री ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि समाज बदले, लोग सुधरें और व्यवस्था बेहतर बने, लेकिन अक्सर स्वयं पहल करने के बजाय दूसरों से बदलाव की अपेक्षा करते रहते हैं। हमें लगता है कि कोई नेता आएगा, कोई अधिकारी आएगा या कोई मसीहा आएगा और सब ठीक कर देगा। जबकि सच्चाई यह है कि बदलाव किसी मसीहा से नहीं, बल्कि हमारे छोटे-छोटे अच्छे कार्यों से शुरू होता है।
उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि कचरा कूड़ेदान में डालिए, एक पौधा लगाइए, किसी गरीब बच्चे की शिक्षा में सहयोग कीजिए, जरूरतमंद की सहायता कीजिए और किसी दुखी व्यक्ति को सांत्वना दीजिए। आपका एक छोटा-सा सत्कर्म किसी दूसरे के जीवन में बड़ी आशा जगा सकता है। जब आप स्वयं उदाहरण बनेंगे, तभी दूसरे आपसे प्रेरणा लेंगे।
स्वार्थ से पेट भरता है, सेवा से आत्मा तृप्त होती है
आचार्यश्री ने अपने प्रेरक संदेश में कहा कि बदलाव की शुरुआत दूसरों को बदलने से नहीं, स्वयं को बदलने से होती है। हमें ऐसा समाज बनाना है जहां प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने हितों के बारे में न सोचकर दूसरों के सुख-दुख में भी सहभागी बने। स्वार्थ से पेट भरता है, लेकिन सेवा से आत्मा तृप्त होती है। महान वह समाज है, जहां पेट और आत्मा दोनों तृप्त हों।
प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
