हर श्रावक ऐश्वर्यसागर महाराज जैसी दीक्षा लेकर समाधिमरण के माध्यम से मोक्ष का मार्ग सुगम करे : आचार्य विनम्रसागर महाराज

धर्म

हर श्रावक ऐश्वर्यसागर महाराज जैसी दीक्षा लेकर समाधिमरण के माध्यम से मोक्ष का मार्ग सुगम करे : आचार्य विनम्रसागर महाराज

‘गेवराई का देवराया’ चरित्र ग्रंथ नहीं, बल्कि वैराग्य की प्रेरणा देने वाला जीवन का दस्तावेज : पूर्व न्यायमूर्ति कैलासचंद्र चांदीवाल

छत्रपति संभाजीनगर।

 

‘गेवराई का देवराया’ केवल एक चरित्र ग्रंथ नहीं, बल्कि वैराग्य की प्रेरणा देने वाला जीवन का दस्तावेज है। इस ग्रंथ के माध्यम से परम पूज्य 108 ऐश्वर्यसागर महाराज के प्रेरणादायी जीवन, समाजसेवा, संतसेवा, धर्मसेवा और उनके त्यागमय जीवन का दर्शन नई पीढ़ी को होता है। यह विचार पूर्व न्यायमूर्ति कैलासचंद्र चांदीवाल ने ‘गेवराई का देवराया’ चरित्र ग्रंथ के प्रकाशन समारोह में व्यक्त किए।

 

 

परम पूज्य 108 ऐश्वर्यसागर महाराज की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ श्री पार्श्वनाथ खंडेलवाल दिगंबर जैन राजाबाजार मंदिर से परम पूज्य उच्चारणाचार्य विनम्रसागर महाराज ससंघ की बैंड-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में कार्यक्रम स्थल हीरा काका प्रांगण में आगमन से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके बाद मान्यवरों एवं अतिथियों के हाथों दीप प्रज्वलन, चरित्र ग्रंथ का विमोचन तथा मुनिसेवा पुरस्कार का वितरण किया गया।

श्रीपाल गंगवाल से ऐश्वर्यसागर महाराज तक का जीवन प्रेरणादायी

पूर्व न्यायमूर्ति कैलासचंद्र चांदीवाल ने कहा कि परम पूज्य 108 ऐश्वर्यसागर महाराज के जीवन पर आधारित ‘गेवराई का देवराया’ में पूर्वाश्रमी के श्रीपाल गंगवाल से लेकर परम पूज्य ऐश्वर्यसागर महाराज बनने तक की उनकी जीवनयात्रा और समाजकार्य का सुंदर चित्रण किया गया है। उनका जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने कहा कि श्रीपालजी गंगवाल शांत स्वभाव, संयम, समर्पण, मुनि-संत सेवा, धर्मसेवा और परिवार के प्रति समर्पण की भावना रखने वाले व्यक्तित्व थे। वे सभी को अपना मानकर चलने वाले तथा शिक्षा एवं सुसंस्कार की चळवळ के प्रणेता थे। लेखक प्रा. डी. ए. पाटील ने इस पुस्तक का अत्यंत सुंदर एवं प्रभावी लेखन और उत्कृष्ट प्रस्तुति की है। इसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है।

अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी ग्रंथ : प्रा. डी. ए. पाटील

कार्यक्रम का प्रास्ताविक करते हुए ग्रंथ के लेखक प्राध्यापक डी. ए. पाटील ने कहा कि पूज्य स्वामी भट्टारक चारुकीर्ति जी ने मुझे प्रेरणा देते हुए कहा था कि देश के साधु-संत, भट्टारक एवं धर्मचरण को आधार देने वाले पूर्वाश्रमी श्रीपालजी गंगवाल, जो बाद में ऐश्वर्यसागरजी महाराज बने, उन्होंने अत्यंत समर्पण के साथ समाज एवं धर्म की सेवा की। उनके जीवनचरित्र को आने वाली पीढ़ी के लिए लिखने का संकल्प मुझसे लिया गया था।

उन्होंने कहा कि ऐश्वर्यसागर महाराज ने संयमित जीवन जीते हुए सल्लेखनापूर्वक समाधिमरण प्राप्त किया। उन्होंने शाश्वत सिद्ध क्षेत्र की ओर अपनी आध्यात्मिक यात्रा में क्षुल्लक दीक्षा, ऐलक दीक्षा तथा मुनि दीक्षा ग्रहण की। परम पूज्य आचार्य पुण्यसागर महाराज से दीक्षा लेकर गुरु के सान्निध्य में ही उनका समाधिमरण हुआ। ऐसा जीवन वास्तव में पुण्यवान जीवन है, जिसने मोक्ष का मार्ग सुगम किया।

उन्होंने कहा कि हम सभी को भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म, संयम और त्याग के मार्ग पर चलना चाहिए। यही इस ग्रंथ का उद्देश्य है और यही इसे जीवन को सफल बनाने की प्रेरणा देने वाला दस्तावेज बनाता है।

गंगवाल परिवार ने किया पादप्रक्षालन व सम्मान

इसके पश्चात उच्चारणाचार्य विनम्रसागर महाराज का पादप्रक्षालन गंगवाल परिवार की ओर से किया गया। ग्रंथ के लेखक प्रा. डी. ए. पाटील सहित उपस्थित मान्यवर अतिथियों का भी ऋषभकुमार, धरमकुमार, सुशीलकुमार एवं संदीपकुमार गंगवाल परिवार की ओर से सम्मान एवं सत्कार किया गया।

इस अवसर पर पूर्व न्यायमूर्ति कैलासचंद्र चांदीवाल, राजाबाजार जैन पंचायत के अध्यक्ष महावीर पाटणी, महावीर ठोळे, संजय पापड़ीवाल, फुलचंद जैन, महावीर शेठी एवं अरुण पाटणी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ऐश्वर्यसागर महाराज को विनयांजलि अर्पित की। सभी ने पूज्य मुनि ऐश्वर्यसागर महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गंगवाल परिवार की ओर से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को चरित्र ग्रंथ भेंट किया गया।

ऐश्वर्यसागर मुनिसेवा पुरस्कार से तीन सम्मानित

कार्यक्रम में पद्मासुंदरी नेमीचंद पाटणी, दिनेश एवं सौ. नीता शेठी तथा ताराबाई हिराचंद कासलीवाल को ‘ऐश्वर्यसागर मुनिसेवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। मान्यवरों के हाथों उन्हें सम्मानपत्र, दुपट्टा एवं पुष्पमाला प्रदान कर सम्मानित किया गया।

 

 

हर श्रावक ऐश्वर्यसागर महाराज के जीवन से प्रेरणा ले : आचार्य विनम्रसागर

आशीर्वचन देते हुए पूज्य उच्चारणाचार्य विनम्रसागर महाराज ने ऐश्वर्यसागर महाराज के जीवनचरित्र के अनेक प्रेरणादायी प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐश्वर्यसागर महाराज का जीवन त्याग, संयम और साधना का आदर्श है। प्रत्येक श्रावक को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि प्रत्येक श्रावक ऐश्वर्यसागर महाराज जैसी दीक्षा लेकर समाधिमरण के माध्यम से मोक्ष का मार्ग सुगम करने का प्रयास करे। उनके जीवन का उद्देश्य आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की प्रेरणा देना था।

डॉ. नेमीचंद पाटणी के नाम से समाजसेवा पुरस्कार की घोषणा

इस अवसर पर डॉ. राजकुमार पाटणी ने अपने समाधिस्थ पिता डॉ. नेमीचंद पाटणी की स्मृति में समाजसेवा पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की।

कार्यक्रम में सुरेश कासलीवाल, संजय कासलीवाल, विलास पहाड़े, ललित पाटणी, विनोद लोहाड़े, प्रवीण लोहाड़े, हेमंत बाकलीवाल, अनिता संजय पहाड़े, अमृत सावजी, राजाभाऊ काले, राजाभाऊ कासलीवाल, प्रमोद कासलीवाल, वर्धमान अजमेरा, राजेश पाटणी, डॉ. प्रवीण कासलीवाल, राजेंद्र अजमेरा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।

कार्यक्रम का सूत्रसंचालन कीर्ति पाटणी ने किया तथा उपस्थित सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

जानकारी नरेंद्र अजमेरा एवं पियुष कासलीवाल

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *