प्राकृत भाषा सत्कार समारोह में गूंजी प्राकृत की महिमा, आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज का 49वां अवतरण दिवस श्रद्धा से मनाया* 

धर्म

*प्राकृत भाषा सत्कार समारोह में गूंजी प्राकृत की महिमा, आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज का 49वां अवतरण दिवस श्रद्धा से मनाया*

 

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।

आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के 49वें अवतरण दिवस के अवसर पर प्राकृत भाषा सत्कार समारोह का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का पादप्रक्षालन कर मंगलमय पूजन किया तथा जिनवाणी भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर चुलगिरी, द्रोणगिरी, पावागिरी, उदगांव, कुंजवन, अंकली (महाराष्ट्र), दिल्ली, मुंबई, तीगोडा एवं वागड़ राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु गुरुदेव के दर्शन एवं अवतरण दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे।

प्रवचन में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने जीवन में संस्कार, ज्ञान और समय के सदुपयोग का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन शब्दों से नहीं, संस्कारों से सँवरता है। अज्ञान के अंधकार में गुरु के ज्ञान का दीपक प्रकाश देता है। उन्होंने कहा कि हर श्वास में जिनका उपकार बरसता है, ऐसे तपस्वी सम्राट के चरणों में हर पल मस्तक झुकता है। मनुष्य की आयु पल-पल घट रही है, लेकिन वह स्वयं को बड़ा समझने लगता है, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों की आयु किसी की होती है तो वह सौधर्म इंद्र की होती है, वह भी एक दिन पूर्ण होती है। इसलिए मनुष्य को अपनी जितनी भी आयु मिली है, उसका सदुपयोग धर्म-ध्यान में करते हुए इस दुर्लभ मानव जीवन को सार्थक करना चाहिए।

समारोह में 13.5 फीट की विशाल पुस्तक सहित ‘तिथि दर्पण’ का विमोचन किया गया। साथ ही आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज द्वारा रचित ग्रंथ ‘अज्झपसारो’, ‘अंकलीकर पाठावली’ का विमोचन हुआ। डाक विभाग द्वारा प्रकाशित डाक टिकट एवं विशेष फोल्डर का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी समारोह में पधारे और आचार्य श्री के चरणों में शुभकामनाएं अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि देश में जब भी कोई बड़ा परिवर्तन हुआ है, उसमें संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ब्राह्मी लिपि, जिसे उन्होंने सभी भाषाओं की जननी बताते हुए कहा कि उसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने लिया है, वह निश्चित रूप से अपने सही स्थान तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जन्म जगत के कल्याण के लिए हुआ है और उनका व्यक्तित्व अद्वितीय है। इंदौरवासियों को इस वर्ष आचार्य श्री का चातुर्मास प्राप्त होना सभी के लिए सौभाग्य की बात है।

आचार्य श्री ने प्राकृत भाषा की विशेषता बताते हुए कहा, “प्राकृत से प्रकृति मुस्कुराती है, संस्कृत से संस्कृति हर्षाती है। अपभ्रंश, मराठी और गुजराती से होते हुए हिंदी सारी दुनिया पर छा जाती है।” उन्होंने कहा कि प्रकृति जैसी भाषाएं सीखें और उन्हें निस्वार्थ भाव से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें। साथ ही प्राकृतिक जीवन जीने का संदेश देते हुए कहा कि जब भी मुख से शब्द निकले तो ‘इंडिया’ नहीं, ‘भारत’ बोलें।

कार्यक्रम में राजा-रेंचो द्वारा विशेष प्रस्तुति दी गई। अंत में मंगलमय एवं भक्तिमय वातावरण में आरती संपन्न हुई। पूरे समारोह में आचार्य श्री के 49वें अवतरण दिवस की श्रद्धा, प्राकृत भाषा के प्रति सम्मान और गुरु भक्ति का भाव देखने को मिला।

माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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