खंडित मूर्तियां भी हैं हमारी अमूल्य विरासत, देशभर में जैन धरोहर को सहेजने में जुटा प्राचीन धरोहर संरक्षण ग्रुप
गांव-गांव बिखरे जैन अवशेषों की पहचान कर जैन तीर्थों और संग्रहालयों में कराया जा रहा संरक्षण
हैदराबाद/
। देश के कोने-कोने में बिखरी जैन धर्म की प्राचीन धरोहरों—मूर्तियों, स्तंभों, शिलालेखों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों को संरक्षित करने की दिशा में अखिल भारतीय प्राचीन धरोहर संरक्षण ग्रुप अनूठी पहल कर रहा है। ग्रुप के सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों में प्राप्त हो रहे जैन अवशेषों की पहचान कर स्थानीय जैन समाज से संपर्क करते हैं और उन्हें निकटवर्ती जैन तीर्थ अथवा जैन संग्रहालय में सुरक्षित एवं संरक्षित कराने का प्रयास करते हैं।
ग्रुप का मानना है कि मूर्ति खंडित हो जाने से उसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व समाप्त नहीं हो जाता। यदि कोई प्रतिमा या अवशेष सौ वर्ष अथवा उससे अधिक प्राचीन है तो वह हमारी संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर है। ऐसे अवशेषों को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को बचाए रखने जैसा है।

गांवों में जानकारी के अभाव में बदल रही धरोहरों की पहचान
ग्रुप की निर्देशिका एवं स्वतंत्र पत्रकार स्वाती संदीप जैन, हैदराबाद ने बताया कि देश के छोटे-छोटे गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में भी जैन धर्म की प्राचीन धरोहरें बिखरी हुई हैं। पुरातत्व विभाग हर स्थान तक पहुंच नहीं पाता। ऐसे में जानकारी के अभाव में ग्रामीण कई बार प्राचीन जैन प्रतिमाओं एवं अवशेषों को बौद्ध या हिंदू देवी-देवताओं से संबंधित मानकर उसी रूप में पूजा करने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे धीरे-धीरे उन प्राचीन अवशेषों की मूल पहचान बदलने का खतरा रहता है। साथ ही संबंधित क्षेत्र में जैन धर्म की प्राचीन उपस्थिति के ऐतिहासिक प्रमाण भी प्रभावित हो सकते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से यह भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
एक वर्ष में चार स्थानों की जैन धरोहर को मिला सुरक्षित ठिकाना
ग्रुप के गठन के बाद महज एक वर्ष में ही देश के विभिन्न क्षेत्रों से चार स्थानों की जैन धरोहर को सुरक्षित कराने में सफलता मिली है। जैन साधु-संतों के आशीर्वाद और समाजजनों के सहयोग से यह कार्य आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में मैनपुरी के समीप प्राप्त धरोहर को वहां के प्रतिष्ठित समाजसेवी अनंत जैन के प्रयासों से सुरक्षित कराया गया। वहीं मध्य प्रदेश के बैतूल के पास जैन मंदिर अध्यक्ष मनीष जैन, इटारसी के समीप जैन मंदिर अध्यक्ष मनीष जैन तथा आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में सुरेश जैन के सहयोग से प्राचीन जैन धरोहर को संरक्षित करने का कार्य संभव हो सका।
ग्रुप के सदस्यों के अनुसार गांवों में मिली प्राचीन धरोहर को समाज को सौंपने के लिए ग्रामीणों को सहमत कराना कई बार बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद संवाद, समझाइश और स्थानीय समाज के सहयोग से इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी है।
देशभर के समाजजनों का जुड़ा है सहयोग
अखिल भारतीय प्राचीन धरोहर संरक्षण ग्रुप में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े समाजसेवी एवं जागरूक लोग अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें स्वाती जैन, नम्रता लोहाडे, सीमा पहाड़े, आशा कासलीवाल, प्रमोद पहाड़े, विकास जैन, योगेश पोरवाल (हैदराबाद), मनीष जैन (उदयपुर), बाबूलाल पाटौदी जैन (नैनवां-बूंदी), सुशील जैन (भोपाल), भारती जैन (धूलिया), पल्लवी जैन (बेलगांव), गौरव जैन (केकड़ी), अभिषेक लुहाड़िया (रामगंजमंडी), शुभम जैन (भोपाल) और अंकित जैन (हीरापुर-सागर) सहित अनेक समाजजन जुड़े हुए हैं।
ग्रुप का उद्देश्य केवल प्राचीन प्रतिमाओं को सुरक्षित करना नहीं, बल्कि उनकी मूल पहचान, ऐतिहासिक महत्व और जैन धर्म से जुड़े प्रमाणों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना है। देशभर में बिखरी ऐसी धरोहरों की पहचान और संरक्षण के लिए समाज के जागरूक लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है।
स्वाती जैन, हैदराबाद से प्राप्त जानकारी।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी




