इंदौर की सड़कों पर उतरी नारी शक्ति, 5 हजार महिलाओं ने दिया अहिंसा का संदेश
भव्य परेड ने भारतीय संस्कृति की झलक से मोहा मन, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और संस्कारित शिक्षा के संदेशों ने खींचा ध्यान
इंदौर। अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला मंडल एवं श्री दिगंबर जैन महासमिति के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन इंदौर में नारी शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। देशभर से पहुंचीं करीब पांच हजार महिलाओं ने भव्य शोभायात्रा के रूप में शहर की सड़कों पर उतरकर अहिंसा, संस्कार, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ और संस्कारित शिक्षा का संदेश दिया। भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करती इस विशाल परेड ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया।
शोभायात्रा में विभिन्न राज्यों से आई महिला मंडलों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। मध्यप्रदेश के जबलपुर, भोपाल, विदिशा, गुना, आरोन, सागर, दमोह, मुंगावली, शाढ़ौरा, चंदेरी सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित देश के विभिन्न प्रांतों की महिला इकाइयों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
शोभायात्रा बनी भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर
शोभायात्रा में चक्रवर्ती मनीष-सपना गोधा विशेष रथ पर सवार रहे। उनके साथ जैन समाज के प्रमुख नवीन आनंद गोधा सहित अन्य प्रमुखजन मौजूद रहे। महिला मंडलों के बैंड, दिव्य घोष और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शोभायात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया।
राजस्थान के बारां से आए महिला मंडल के दिव्य घोष ने भी विशेष आकर्षण पैदा किया। विभिन्न नगरों से आए दल अपने-अपने संदेश और प्रस्तुतियों के साथ आगे बढ़ रहे थे। शोभायात्रा में नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, महिलाओं के जीवन में संस्कार और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया गया।
शोभायात्रा के पीछे परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ 18 पिच्छिकाओं के साथ चल रहे थे। उनके साथ मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, चक्रवर्ती मनीष-सपना गोधा, कार्याध्यक्ष संजय सामरिया, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, धर्मेंद्र सिमकेम, सौरव बड़जात्या, मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा, मंत्री अक्षय कासलीवाल, संजय पाटोदी, राहुल सेठी सहित अनेक प्रमुखजन शामिल रहे।
रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। अनेक स्थानों पर मुनिश्री के पाद प्रक्षालन और आरती करने का सौभाग्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। शोभायात्रा आगे बढ़ते हुए सुधामय सभा मंडप पहुंची, जहां यह विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
महिलाओं को शिक्षा के साथ संपत्ति में अधिकार दें : सुधासागर
सुधामय सभा मंडप, स्टेशन रोड स्थित अग्रवाल मंगल पैलेस में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि आज शिक्षा का युग है। पिता को बेटा-बेटी में भेद किए बिना सबसे पहले अपनी बेटियों को शिक्षा देनी चाहिए। नारी को घर की मालिकियत और संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं का आजीविका अर्जित करना गलत नहीं है। यदि पति विकलांग हो जाए या परिवार की आवश्यकता हो तो महिला का कमाना कोई बुरी बात नहीं है। बेटी यदि अपने माता-पिता के लिए कमाती है या महिला अपने पति और बच्चों के लिए आजीविका अर्जित करती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन केवल शौक के लिए नहीं, आवश्यकता और जिम्मेदारी के भाव से आजीविका अर्जित करनी चाहिए।


आज हर व्यक्ति को सोचना होगा—हम किसके लिए कमा रहे हैं?
मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में यह विचार करना चाहिए कि वह किसके लिए कमा रहा है। घर में महिलाओं और बेटियों को सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साथ अपने संस्कार और मर्यादा को बनाए रखने का संदेश दिया।
“जितनी पवित्रता से घर से निकली हैं, उतनी ही पवित्रता से लौटें”
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में पवित्रता और संस्कारों की रक्षा स्वयं करनी होती है। उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोहनदास करमचंद गांधी विदेश जाने लगे तो उनकी माता ने उन्हें संस्कारों की मर्यादा बनाए रखने का संकल्प दिलाया था। गांधीजी ने विदेश जाते समय जैसा जीवन था, वैसा ही लौटकर आने का संकल्प लिया और यही संस्कार आगे चलकर उन्हें महात्मा गांधी बनाने की दिशा में ले गए।
उन्होंने महिला सम्मेलन में उपस्थित नारी शक्ति से कहा कि “हमें अपनी पवित्रता की रक्षा स्वयं करनी होगी।”
“सौभाग्य से इतने बड़े संत मिले हैं, सारे काम अभी कर लो”
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में जब संतों का सान्निध्य और मार्गदर्शन मिले तो उसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे यहां से प्रसन्न होकर जाएं और उसी प्रसन्नता के साथ अपने घर लौटें। जीवन में मिले अच्छे संस्कारों और संदेशों को केवल सुनें नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारें।
महिलाओं की परेड ने बताया श्रद्धा का गहरापन : सपना गोधा
चक्रवर्ती सपना गोधा ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक रहा। देशभर से आई महिलाओं ने विभिन्न संदेशों के साथ जिस अनुशासन और उत्साह से शोभायात्रा में सहभागिता की, वह अद्भुत था। इतनी सुंदर प्रस्तुतियों को देखकर सहज ही अनुभव होता है कि परम पूज्य गुरुदेव के प्रति समाज में कितनी गहरी श्रद्धा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं ने वर्तमान परिस्थितियों में स्वस्थ और संस्कारित जीवन जीने के साथ सामाजिक जागरूकता के संदेश भी प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर महिला महासमिति की आशा रानी पांड्या सहित जैन समाज के विभिन्न संगठनों का कमेटी की ओर से सम्मान किया गया।
“अपना जीवन कुंदन सा चमकाना है तो पुरुषार्थ करें”
मुनिश्री ने कहा कि “कुवत कम और गुस्सा ज्यादा होना मिट जाने का लक्षण है।” अहंकार के कारण व्यक्ति गलती होने के बाद भी झुकना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन के कर्ता स्वयं बनना चाहिए। कोई कितना भी अपशब्द कहे, हमें अपनी शांति नहीं खोनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाले संकटों से घबराने के बजाय पुरुषार्थ करें। अपने कार्य स्वयं करने, अपनी बुद्धि का उपयोग करने और आत्मनिर्भर बनने की आदत डालें। “सुरक्षित घर से निकलें और सुरक्षित ही घर लौटें—इसे अपने जीवन का सूत्र बनाएं।”
अष्टद्रव्य के थाल सजाओ प्रतियोगिता में सदलगा सागली, कर्नाटक आगे
राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान आयोजित ‘अष्टद्रव्य के थाल सजाओ’ प्रतियोगिता में कर्नाटक के सदलगा-सगली की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बाजी मारी। प्रतियोगिता में महिलाओं ने धार्मिक भावना, कला और सृजनात्मकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






