*अन्तर्मना उवाच* (25 मार्च)*प्रेम, सेवा, करूणा, भक्ति से भरी प्रार्थनाएं..*जीवन के सभी बन्धनों से मुक्त करने की सामर्थ्य रखते हैं..!*
*प्रेम, सेवा, करूणा, भक्ति से भरी प्रार्थनाएं..*
*जीवन के सभी बन्धनों से मुक्त करने की सामर्थ्य रखते हैं..!*जीवन का उद्देश्य सभी जीवों के प्रति प्रेम, सहयोग की भावनाओं को विकसित करने का होना चाहिए। *जीव मात्र से प्रेम, सेवा और सहयोग का होना चाहिए।*

माना कि विज्ञान और प्रौद्योगिकीय ने सुख सुविधाओं के अनेक संसाधनों में खूब प्रगति की है, लेकिन मन की शान्ति और चेहरे की प्रसन्नता भी छीन ली है। शिक्षा के क्षेत्र में खूब प्रगति की, लेकिन चरित्र में पतन और नैतिक आचरण में दिन-प्रतिदिन गिरावट बढ़ती जा रही है।




*आधुनिक शिक्षा और भौतिक संसाधनों ने आदमी को पक्षी की तरह उड़ना तो सिखाया, मछली की तरह जल में तैरना भी सिखाया लेकिन इन्सान की तरह चलना और जीना नहीं सीखा पाया।* इसलिए आज कई लोग वातानुकूलित कमरों में आत्महत्या कर रहे हैं और नौजवान से लेकर परिवार के गर्जन नींद की गोलियां खाकर भी सूकून की नींद नहीं सो पा रहे हैं। क्योंकि उनके पास सुख सुविधाओं के नाम सब कुछ है, लेकिन मन की शान्ति और चेहरे की प्रसन्नता ऐसे चली गई जैसे सूरज निकलने के बाद उल्लू गोल हो जाते हैं।
भारत की भूमि पर जन्म लेना और मनुष्य जीवन पाना, ऐसा ही है जैसे सुई के छेद से हाथी को निकालना। इसलिए *मनुष्य जीवन के सुखद भविष्य के लिए प्रेम, करूणा, सेवा, सहयोग, सदभाव, मैत्री से ओतप्रोत होकर प्रार्थना करो* —
*सुखी रहे सब जीव जगत के, कोई कभी ना घबरावे…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
