16 दिन का निर्जल उपवास पूर्ण, मुनि श्री वीरगुप्तजी की तपस्या ने श्रद्धालुओं को किया प्रेरित
फलटण धर्म नगरी महाराष्ट्र में दशलक्षण पर्व के दौरान बालक-बालिकाओं से लेकर युवाओं तक ने भी की विविध उपवास साधनाएं
फलटण।
दक्षिण जैनों की काशी के नाम से प्रसिद्ध धर्मनगरी फलटण में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर धर्म, तप और संयम की अनुपम साधना देखने को मिली। आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी महाराज के शिष्य मुनि श्री वीरगुप्तजी महाराज ने 16 दिनों तक अन्न और जल का पूर्ण त्याग करते हुए निर्जल उपवास की कठिन साधना पूर्ण की। उनकी इस तपस्या से जैन समाज में विशेष आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
मुनि श्री वीरगुप्तजी महाराज इंदौर के कालानी नगर त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर में अनेक वर्षों तक मंत्री पद पर सेवा देने के बाद वैराग्य मार्ग पर अग्रसर हुए। 16 दिन की कठोर निर्जल साधना के बाद वे अत्यंत अशक्त अवस्था में भी गुरु चरणों में प्रतिक्रमण कर रहे हैं। इस दौरान आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी महाराज अपने शिष्य के प्रति वात्सल्य भाव रखते हुए स्वयं उनकी सेवा एवं देखभाल कर रहे हैं। वहीं मुनि श्री विमलगुप्तजी भी अपने लघु गुरु भाई की सेवा में तत्पर हैं।
सेवाभाव के साथ सागर समर्थ जैन ने भी किए 16 उपवास
मुनि श्री वीरगुप्तजी महाराज की सेवा में जुटे सागर समर्थ जैन ने भी 16 उपवास की साधना की। तप और सेवा के इस समन्वय ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष प्रेरणा का संचार किया।
बच्चों और युवाओं ने भी अपनाया तप का मार्ग
फलटण में दशलक्षण महापर्व के दौरान 9 वर्ष की आयु के बच्चों से लेकर 20 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं, युवक-युवतियों ने भी विभिन्न प्रकार की तप साधनाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाजजनों के अनुसार दशलक्षण के 10 उपवास, पंचमेरु के 5 उपवास, रत्नत्रय के 3 उपवास तथा अनंत व्रत की साधना सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और विधान निर्विघ्न रूप से संपन्न हुए। इन साधनाओं का विधान एवं उद्यापन भी हर्षोल्लास के साथ किया गया।
शिष्यों की साधना में गुरु का वात्सल्य
आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी महाराज के सानिध्य में चल रही इन तप साधनाओं ने फलटण के धार्मिक वातावरण को विशेष बना दिया है। मुनि श्री वीरगुप्तजी महाराज की 16 दिन की निर्जल तपस्या के बाद अब श्रद्धालु उनके निरंतराय पारणा, उत्तम स्वास्थ्य और आगे की आध्यात्मिक साधना के लिए नमोकार मंत्र का जाप कर रहे हैं।
जैन समाज के श्रद्धालुओं ने तपस्वी मुनिराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी संयम और साधना के मार्ग पर अडिग रहना सभी के लिए प्रेरणादायी है।
प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312 











