अहिंसा के धर्म पर निराधार आरोप अस्वीकार्य” — आचार्य श्री सुनीलसागर जी

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अहिंसा के धर्म पर निराधार आरोप अस्वीकार्य” — आचार्य श्री सुनीलसागर जी

 

आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमती मेनका गांधी द्वारा जैन साधु-संतों पर लगाए गए आरोप निराधार एवं तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह दावा किया जा रहा है कि जैन समाज या जैन साधुओं के कारण 15 लाख मोरों की हत्या हुई है, तो इसके प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किए जाने चाहिए, अन्यथा इस प्रकार के आरोप समाज को भ्रमित करने वाले हैं।

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आचार्य श्री ने कहा कि जैन साधु-संत उन मोरपंखों को कभी स्वीकार ही नहीं करते जो किसी प्रकार की हिंसा से प्राप्त हुए हों। जैन परंपरा में पिच्छी निर्माण हेतु केवल प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोरपंखों का ही उपयोग किया जाता है। मोर अपने पंख स्वयं छोड़ते हैं, जिन्हें ग्रामीण, आदिवासी एवं अन्य समाजजन एकत्रित कर जैन व्यापारियों तक पहुंचाते हैं और वहां से वे साधु-संतों एवं आर्यिकाओं के पास पहुंचते हैं।

 

 

 

 

उन्होंने बताया कि पिच्छी का उपयोग किसी जीव को हानि पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए किया जाता है। जिस धर्म में एक चींटी को भी कष्ट पहुंचाना पाप माना जाता हो, जहां साधु-संत अहिंसा के पालन हेतु आजीवन पैदल विहार करते हों और वाहन का उपयोग तक न करते हों, वहां लाखों मोरों की हत्या जैसी बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

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आचार्य श्री ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा और जीव-दया का पर्याय है। अतः बिना प्रमाण के इस प्रकार के आरोप लगाना न केवल जैन समाज की भावनाओं को आहत करता है, बल्कि सत्य और तथ्य के भी विपरीत है।

 

 

आचार्य भगवन ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा और जीव-दया का धर्म है। अतः यह मानना कि जैन साधुओं के कारण बड़ी संख्या में मोरों की हत्या होती है, जैन सिद्धांतों और साधुचर्या की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है। जैन परंपरा में प्रत्येक जीव के जीवन का सम्मान किया जाता है और उसकी रक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।

– माही धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ राजस्थान*से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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