क्षमावाणी वचन के साथ मन अंतरंग भाव से मनाना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी क्षमा वाणी पर्व आत्म विशुद्धता का पर्व है
सीकर
अंतरंग मन से क्षमा चाहने पर ही परिणाम भाव में निर्मलता आती है,आप वाणी से क्षमा याचना कर रहे हैं किंतु मन से क्षमा याचना नहीं की तो क्षमा वाणी पर्व मानना व्यर्थ है। क्रोध बैर का रूप ले लेता है पर्व पर गठान खुलना जरूरी है तभी सच्चे अर्थ में क्षमा होती है। क्षमा धारण नहीं करने से आत्मा का अहित होता है भगवान की दिव्य ध्वनि को जीवन में अपनाना चाहिए सभी को जिनवाणी से ,मंदिरों से ,तीर्थ क्षेत्र से क्षमा याचना करना चाहिए क्योंकि हम क्षेत्र की रक्षा नहीं कर जीर्णोद्धार के नाम पर उनकी संस्कृति मौलिकता नष्ट कर रहे हैं कष्ट पूर्ण तीर्थ यात्रा से ही कर्मों की निर्जरा होती है जबकि आप तीर्थ पर आधुनिक सुविधाएं चाहते हैं।

यह मंगल उपदेश क्षमावाणी पर्व पर दंग की नसिया में आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की ।डा राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि मुझ में क्रोध नहीं है मैं सबसे क्षमा चाहता हूं सब जीव मुझे क्षमा करें दूसरों के अपराध गलती हम याद रखते हैं किंतु हमारे अपराध हमारी गलती हमें याद नहीं रहती है क्षमा वाणी पर्व सब जीवों के प्रति मैत्री भाव रखने का संदेश देता है। क्षमा को जीवन का अंग बनाना चाहिए, दूसरे के अपराध भूलने पर ही वास्तविक क्षमा होती है। बैर भाव ,क्रोध वर्षों अनेक जन्मों तक आत्मा का नुकसान करता है,क्षमा से ही धर्म अवतरित होता है। क्षमा पर्व आत्मा की मालीनता दूर कर विशुद्धता लाता है जिस प्रकार आप गंदे कपड़े धोते हैं ,दीपावली पर साफ-सफाई करते हैं उसी प्रकार धार्मिक पर्व आत्मा को स्वच्छ करने के पर्व होते हैं। आचार्य श्री ने यशोधर मुनि,राजा श्रेणिक ओर चेलना रानी, एवं दूसरी कथा मरूभूती ओर कमठ के जीव की कहानी से बताया कि कमठ ने 10 जन्मो तक बैर माना किंतु पार्श्वनाथ भगवान के जीव ने हर जन्म में क्षमा भाव रखा।इसके पूर्व मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी ने अपने उपदेश में सच्चे देव, शास्त्र, गुरु पर श्रद्धा करना चाहिए ,और अपनी आत्मा को निर्मल बनाने की प्रेरणा दी।किसी भी साधु की निंदा नहीं कर विचारों परिणामों को निर्मल रखे। आज 28 को होगा महापारणा आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री ध्येय सागर जी के 32 उपवास , आर्यिका श्री जिनेश मति के 16 उपवास का , श्राविका ज्योति बाला जैन सनावद के 32 उपवास का एवं अर्पित चूड़ीवाल गौहाटी के 16 उपवास का महापारणा आचार्य संघ सान्निध्य में होगा। नगर के सभी जिनालयों में श्री जी के अभिषेक के बाद समाज ने श्री जी आचार्य संघ ओर एक दूसरे से वर्ष भर में जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना बड़ो के चरण स्पर्श एवं हाथ जोड़कर मंदिरों और निवास पर जाकर की।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



