हवा ने माफी तो मांग ली लेकिन – सारे पत्ते गिर चुके थे..! व्रत चक्रवर्ती पटटविभुषन अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज महाराज
पुष्पगिरी तीर्थ
पुष्पगिरी तीर्थ में क्षमावाणी पर्व पर उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। एक पल नहीं लगता किसी का दिल दुखाने में,
लेकिन पूरा साल लग जाता है माफी मांगने में..
मुझे नहीं पता कि बुरे इन्सान का दिल कैसा होता है..??
लेकिन मैं यह जानता हूँ कि अच्छे इन्सान का दिल बैर की गाँठ बांध कर नहीं मरता। उसने छोटी भूल की पर हम ने याद रखकर बड़ीभूल की
इसलिए भूल होना प्रकृति है, स्वीकारना संस्कृति है और मन में बैर की गाँठ बाँधकर मर जाना विकृति है। अतः जीवन में — सुख शान्ति, आनंद और प्रेम चाहते हो तो इस छोटे से वाक्य को जिन्दगी का मूल मन्त्र बनाओ – तुम सही, मैं गलत – बात यहीं खतम। उत्तम क्षमा। क्योंकि – आज के इस दौर में इंसान की जब जरूरत खत्म हो जाती है, तो बोलने का ढंग और देखने का नजरिया बदल जाता है। इसलिए दुनिया तुम्हें जैसा देखना चाहती है, तुम वैसे कभी मत दिखना। बल्कि तुम खुद को जैसा देखना चाहते हो, वैसा बनने के लिये जान भी कुर्बान करनी पड़े तो कर देना।
ध्यान रखना! सुनी हुई बातों पर यकीन मत करना। क्योंकि अक्सर कान के कच्चे लोग अच्छे दोस्त और अच्छे गुरू को खो देते हैं। ज़िन्दगी में – अब अफसोस करना छोड़ दो। हम स्वयं को ऐसा बनायें कि हमें छोड़ने वाले लोग ज़िन्दगी भर अफसोस करे, और करीब आये तो क्षमा करें । क्षमा मांगने का परिणाम जो भी हो, परन्तु कोशिश लाजवाब होनी चाहिए।
कुछ इस तरह मैंने जिन्दगी को आसान कर लिया,
किसी से माफ़ी मांग ली और किसी को माफ कर दिया.. अब कटी हुई टहनियाँ, कहाँ छांव देती है.. हद से ज्यादा उम्मीदें, अक्सर घाव देती है…!!!
ॐ नमः सबसे क्षमा – सबको क्षमा ॐ नमः। 
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प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







