पुष्पगिरी में गुरु-शिष्य की अनुपम क्षमायाचना ने भावुक किया जनसमुदाय
गणाचार्य पुष्पदंत सागर ने शिष्य अंतर्मना प्रसन्न सागर के समक्ष नतमस्तक होकर मांगी क्षमा, भक्तों ने लगाए जयकारे
सोनकच्छ।
गुरु-शिष्य की क्षमायाचना का ऐसा भावपूर्ण प्रसंग सामने आया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने वर्षभर में हुई भूलों के लिए भगवान के समक्ष प्रतिक्रमण कर क्षमा याचना की। इसके बाद परम गुरु और उच्च पद पर विराजमान होते हुए भी उन्होंने अपने शिष्य अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के समक्ष नतमस्तक होकर क्षमा मांगी। शिष्य ने भी गुरु के चरणों की रज अपने मस्तक पर लगाकर त्रिवार वंदना की और क्षमायाचना की।
इस अद्भुत गुरु-शिष्य भाव को देखकर उपस्थित भक्तों ने जैन धर्म के जयकारे लगाए। भावुक संतों एवं श्रद्धालुओं ने भी गुरु के चरणों की रज अपने मस्तक पर लगाई। इसके बाद गणाचार्य श्री ने अपने सभी शिष्यों को गले लगाकर क्षमा प्रदान की। यह दृश्य गुरु-शिष्य परंपरा, विनय और क्षमा धर्म की अनुपम मिसाल बन गया।
जन्मोत्सव नहीं, वैराग्य का उत्सव मना रहा हूं
शाम को सौम्यमूर्ति उपाध्याय मुनि श्री पीयूष सागर जी महाराज का जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री ने गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज का चरण प्रक्षालन किया। उन्होंने कहा, “मैं जन्मोत्सव नहीं मना रहा हूं, गुरु के चरणों में बैठकर वैराग्य का उत्सव मना रहा हूं।”

प्रवक्ता रोमिल जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के अवसर पर हुआ यह गुरु-शिष्य क्षमायाचना का प्रसंग उपस्थित जनसमुदाय के लिए आत्मशुद्धि, विनय और क्षमा का प्रेरणादायी संदेश बन गया।


प्रचार प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी सोनकच्छ नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



