अल्पायु में तप की मिसाल बनी कथांशी ठाई, दशलक्षण पर्व में की 5 उपवास और 5 एकासन की साधना
रामगंजमंडी।
दशलक्षण पर्व की पावन बेला में धर्म, संयम और साधना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सुश्री कथांशी ठाई, पुत्री श्री राजेश एवं श्रीमती अनिता ठाई ने 5 उपवास एवं 5 एकासन की साधना पूर्ण की। अल्पायु में कठिन तप आराधना कर कथांशी ने धर्म के प्रति अपनी गहरी आस्था और संस्कारों का परिचय दिया। निश्चित रूप से दादी श्रीमती विमला ठाई के संस्कार पौत्री में परिलक्षित होते है।
दशलक्षण पर्व के दौरान तपस्या के साथ-साथ कथांशी प्रतिदिन देवदर्शन, पूजन एवं धार्मिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की नगर में पधारने वाले साधु-संतों की सेवा एवं आहार व्यवस्था में भी वे तन-मन-धन से सहयोग करती हैं।
कथांशी की धार्मिक रुचि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। वे साधु-संतों के आकर्षक चित्र भी बनाती हैं, जिनमें उनकी रचनात्मक प्रतिभा और धर्म के प्रति अनुराग सहज रूप से दिखाई देता है।
अल्पायु में कठिन साधना, धार्मिक संस्कार और सेवा भावना का यह संगम समाज के लिए प्रेरणादायी है। कथांशी की तप आराधना पर परिवारजनों, समाजजनों एवं धर्मप्रेमियों ने अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल धार्मिक जीवन की मंगलकामना की।
— तप की यह साधना कथांशी के संस्कारों और धर्म के प्रति समर्पण की सुंदर मिसाल बनकर सामने आई है।
तप की अनंत अनुमोदना







