जंगल की साधना अर्हम योग की
द्रोणगिरी
अर्हम योग प्रणम्य सागर महाराज के अर्हम योग से न जाने कितने भव्य जन का कल्याण हुआ है। द्रोणगिरी का यह पर्वत यू ही सन्तो की साधना स्थली नही कही जाती है ऐसी शीतलहर जहां हम सभी रजाई व जर्सी पहनकर है। लेकिन यह महासंत खुले आकाश के बीच घण्टो जंगल के बीच गुफ़ा में बैठ एकाग्रता के साथ साधना कर रहे है इनकी साधना, इनका परिषह ही इनकी पहचान है। इसी साधना से जन जन का कल्याण हो रहा है, यही है जंगल की साधना यह छायाझलक जिन्होंने भी ली वह अनुमोदना के पात्र है। जिससे साक्षात दिगबरत्व की साधना क्या है। यह साक्षात देखी जाती है।
धन्य है मुनिराज धन्य है परिषह विजयी साधक
कोटि कोटि नमन
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
