उपवास से जीवन में क्षमा, सरलता ,मृदुता अर्जित करें तथा अहंकार ,नाम ,यश ,प्रशंसा की भावना नहीं लावे तभी उपवास सार्थक होगा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सीकर
राजकीय अतिथि 77 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 41 साधुओं सहित दंग की नशिया में 58 वा वर्षायोग कर रहे है।सीकर जैन समाज के इतिहास में पहली बार 41 साधुओं का श्री संघ विराजित है। श्रुत्रो के अनुसार पहली बार इतनी संख्या में हर उम्र के समाज जनों ने कुछ ने पहली बार उपवास किए। उपवास अर्थात आत्मा के समीप रहना होता है उपवास से अनेक व्यक्तियों ने व्रत नियम धारण किये इंदौर के डॉ राजेश पंचोलिया ने भी प्रतिवर्ष 2023 से इस वर्ष भी 11 उपवास की तप साधना की। आपकी पुत्री आर्यिका श्री महायश मति एवं बहन भी आर्यिका श्री निर्मोह मति जी है। आपकी श्रीमती संगीता पंचोलिया ने भी 32 एकासना किया। उपवास सभी उम्र के लोगों ने कर आत्म साधना की। इसके पूर्व आचार्य श्री समक्ष उपवास कर्ताओं ने श्रीजी आचार्य श्री को अष्ट द्रव्य भेंट कर नियम अंगीकार किये ।

वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सीकर में 10 लक्षण पर्व पर रत्नत्रय दिवस पर उपवास करने वाले तपस्वीयो को धर्म सभा को संबोधित कर बताया कि कर्म बंध परिणाम के कारण होता है ,आत्मा कर्मों से बंधी है तप से कर्मों की निर्जरा होकर नवीन कर्म का बंघ नहीं होता ,आप लोगों में किसी ने 32 ,16, 10 से के उपवास लगभग 34 से अधिक लोगों ने किए हैं ।तप से जीवन में साहस और उत्साह के साथ जीवन को सार्थक करने का प्रयास किया है। प्रतिदिन अभिषेक पूजन के माध्यम से धर्म में उपयोग लगाकर भाग लिया आचार्य श्री ने आगे देशना में बताया कि यह सभी के लिए अनुकरणीय है जिन्होंने उपवास किया उनके लिए कल भी संदेश दिया था कि अपने लंबे समय तक तप धर्म धारण कर उपवास किया यह तभी सार्थकता को प्राप्त होगा कि छोटे-छोटे नियम लेकर जीवन को संयमित करें जिन्होंने उपवास किए हैं जिस प्रकार वस्तु को शुद्ध करने के लिए अग्नि में तपाते हैं ,आभूषण भी स्वर्ण के बनते हैं उसकी कालिमा को अग्नि में तपाकर दूर किया जाता है ।उसी प्रकार आत्मा को भी शुद्ध करने के लिए कषाय कर्म रूपी कालिमा को तप के माध्यम से दूर किया जाता है। पर्व कर्म बंधन से छूटने का माध्यम है। आपको आवश्यकता है कि श्रावक व्रत का पालन करें तभी तप सार्थक होगा जो भी धर्म क्रिया करें उस कर्म बंधन नहीं होकर कर्मों का क्षय होना चाहिए तपस्वी शब्द का उपयोग मुनिराज् के लिए है किंतु आप तप करने वालों को तपस्वी निरूपित किया गया है इसलिए आपको तपस्वी शब्द का सम्मान बनाकर रखना होगा तत्वार्थ सूत्र का पहला सूत्र रत्नत्रय बताया है। आत्मा को ऊपर उठने के लिए रतनत्रय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र धर्म रूपी मोटर से जीवन को ऊपर उठाएं तप से जीवन में अहंकार नाम यश प्रशंसा नहीं होना चाहिए वरन जीवन में क्षमा ,मृदुता और सरलता होना चाहिए तभी जीवन उन्नती को प्राप्त होता है भगवान से यही भावना भावे कि आगे भी हम तप करेंगे आचार्य श्री ने बताया कि आज पारणे में शक्ति अनुसार उपवास के अनुकूल भोजन सामग्री लेवे ताकि शरीर स्वस्थ रहे।महेश बाकलीवाल , अजीत जयपुरिया,अभिनव सेठी,संतोष विनाक्या , सुमतप्रकाश मोदी अनुसार आचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षायोग चातुर्मास समिति*श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आम्नाय प्रबंध समिति*एवं सकल दिगम्बर जैन समाज सीकर के सहयोग से आचार्य श्री के आशीर्वचन के बाद सकल दिगंबर जैन समाज ने सभी तपस्वियों की शोभायात्रा पारस भवन से निकाली जिसमे तप करने वालो को बग्धी में बिठाया गया।जिसमे समाज के हजारों लोगों ने उपस्थित रहकर तप की अनुमोदना की।समापन पारस भवन दंग की नसिया में हुआ। जुलूस के पूर्व सकल जैन समाज सीकर ने तपस्वियों का बहुमान कर पारणा करा कर स्मृति चिन्ह भेंट किये।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
