कर्मों की अशुद्धि मलिनता तप रूपी अग्नि से दूर की जाती है तप आवश्यक धर्म है कर्मों रूपी नदी पर संयम रूपी बांध बनाकर तप से कर्मों की निर्जरा की जाती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
सीकर
वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित दंग की नसिया बजाज रोड सीकर में विराजित हैं।आचार्य धर्म सागर सभागृह में 10 लक्षण महापर्व पर प्रवचन माला चल रही है आज उत्तम तप धर्म पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विवेचना की। प्राणी कर्मों के बंधन से जकड़ा है इस कारण मोक्ष मार्ग पर आरुण नहीं है ,व्यक्ति इच्छाओं का दास होने से तप नहीं करता है।कर्मों के निर्जरा के लिए तप किया जाता है। सीकर में भी अनेक साधु श्रावक श्राविका 16 कारण व्रत और 10 लक्षण व्रत कर रहे हैं।इनसे प्रेरणा लेना चाहिए वैयावृति करना चाहिए

डा राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि भौतिक और आध्यात्मिक सुख तप धर्म से मिलता है कर्म रूपी पर्वत को तप रूपी जेसीबी मशीन से गिराया जाता है। उपवास स्वाध्याय बहिरंग,अंतरंग तप करते समय भाव परिणाम विचार निर्मल रहना चाहिए तभी पुण्य की प्राप्ति होगी। कर्म रूपी नदी पर संयम रूपी बांध बनाकर कर्मों का संवर कर तप से कर्मों की निर्जरा की जाती है। आचार्य श्री ने तप के दो प्रकार बहिरंग और अंतरंग तपों की विवेचना की। तप करते समय आलस्य नहीं होना चाहिए, शरीर के प्रति ममत्व भाव नहीं होने पर ही परिणाम में विशुद्धता निर्मलता आती है ।धर्म सुख देता है जिस प्रकार लौकिक जीवन में आप लगन पूर्वक कार्य करते हैं ,उसी प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भी लगन पूर्वक कार्य करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
