इंदौर में रामगंजमंडी के गुरु भक्त मंडल के भक्तों ने पेश की सेवा-समर्पण की मिसाल
श्रावक संस्कार शिविर में शुद्धता और अनुशासन के साथ कर रहे शिविरार्थियों की सेवा, मनीष-सपना गोधा ने की व्यवस्थाओं की सराहना
रामगंजमंडी।
इंदौर इन दिनों केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और सेवा के अद्भुत संगम के लिए भी चर्चा में है। दशलक्षण महापर्व की पावन बेला में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रावक संस्कार शिविर में देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। शिविर में जहां हजारों श्रद्धालु धर्म, संयम और संस्कारों की साधना में जुटे हैं, वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे भक्त उनकी सेवा में अपना योगदान देकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
सुधासागर महाराज के सान्निध्य में संस्कारों का शंखनाद
श्रावक संस्कार शिविर केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन में नियम, संयम, अनुशासन और संस्कारों को उतारने की पाठशाला बन गया है। यहां शिविरार्थियों को त्याग, तप, आत्मचिंतन और संयमित जीवन की प्रेरणा दी जा रही है। दशलक्षण महापर्व के आध्यात्मिक वातावरण में साधना के साथ सेवा का भाव भी पूरे उत्साह के साथ दिखाई दे रहा है।

हाड़ौती से पहुंचा सेवा का समर्पित समूह
इस सेवा-साधना में हाड़ौती की प्रसिद्ध नगरी रामगंजमंडी की भी उल्लेखनीय सहभागिता है। रामगंजमंडी से पहुंचे भक्तों का समूह शिविरार्थियों की सेवा में पूरी निष्ठा से जुटा हुआ है। शुद्धता, धार्मिक मर्यादा और अनुशासन का विशेष ध्यान रखते हुए शिविरार्थियों को भोजन कराना इस सेवा दल की प्रमुख जिम्मेदारी है।
रामगंजमंडी के गुरु भक्त मंडल में नीरज जैन, नितीन जैन सबदरा, मुकेश जैन, ऋषभ जैन, भूपेंद्र जैन, पदम जैन दुगेरिया एवं प्रमिला जैन दुगेरिया सहित भक्तजन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एयरपोर्ट के सामने स्थित बघेरवाल जैन परिसर में रहकर यह समूह निरंतर सेवा कार्य में जुटा हुआ है।
सेवा देखकर मनीष-सपना गोधा ने की अनुमोदना
रामगंजमंडी के भक्तों द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की चर्चा अब शिविर परिसर में भी हो रही है। इसी क्रम में श्रावक श्रेष्ठी दंपति श्री मनीष गोधा एवं श्रीमती सपना गोधा ने सेवा स्थल पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को करीब से देखा।
उन्होंने भक्तों द्वारा की जा रही सेवा, भोजन व्यवस्था में बरती जा रही शुद्धता, अनुशासन और कुशल प्रबंधन की सराहना की तथा उनके निस्वार्थ सेवा भाव की अनुमोदना की। इस दौरान सेवा दल के सदस्यों के साथ आत्मीय मुलाकात करते हुए उन्होंने छायाचित्र भी खिंचवाया।
जब सेवा में भक्ति घुली, तो बन गया प्रेरणा का प्रसंग
रामगंजमंडी के भक्तों का यह प्रयास केवल भोजन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुरु सान्निध्य में सेवा को साधना मानकर किए जा रहे समर्पण का सुंदर उदाहरण है। दूर शहर में रहकर भी अपने नगर की धार्मिक परंपरा और सेवा संस्कारों को जीवंत रखना निश्चित रूप से गौरव का विषय है।
दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि का पर्व है और ऐसे अवसर पर किसी साधक की सेवा करना भी अपने आप में पुण्य और विनय की भावना को मजबूत करने वाला कार्य है। रामगंजमंडी के इन भक्तों की सेवा-निष्ठा ने यह संदेश दिया है कि भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत के समय किसी की सेवा में अपना समय, श्रम और सामर्थ्य समर्पित करना भी भक्ति का ही स्वरूप है।
रामगंजमंडी से इंदौर पहुंचा यह सेवा समूह निश्चित रूप से हाड़ौती की सेवा परंपरा और युवा शक्ति के समर्पण का प्रेरक चेहरा बनकर सामने आया है।
— अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी




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