आगम अनुसार वचन ही सत्य धर्म है सत्य आत्मा के हित में होता है सत्य बोलने वालों की देवता रक्षा करते है ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 

धर्म

आगम अनुसार वचन ही सत्य धर्म है सत्य आत्मा के हित में होता है सत्य बोलने वालों की देवता रक्षा करते है ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर

प्रतिदिन धर्म के 10 अंगों की विवेचना हो रही है चार कषाय क्रोध, मान ,माया, लोभ में क्रोध को क्षमा से, मान को मार्दव से माया को आर्जव धर्म से दूर किया जाता है।कुंदकुंद आचार्य ने अपनी गाथा में मुनियों के लिए चौथा धर्म सत्य का बताया है इसलिए शोच धर्म के पहले हम सत्य धर्म को लेते हैं। सत्य वचनों और मान्यता के अनुसार कहा जाता है 21000 वर्षों में 2600 वर्ष बीत गए हैं उसके बाद पृथ्वी और धर्म नष्ट होगा अनेक प्रकार की वर्षा से यह भूमि नष्ट होकर रसातल में जाएगी इसलिए जिन परिवारों की कुल परंपरा निर्दोष है प्रलय काल में देवता पर्वत की गुफा में उनका रक्षण करेंगे और वही शुद्ध कुलके पति पत्नी जोड़े महापुरुष तीर्थंकर बनेंगे। तीर्थंकर महापुरुष शुद्ध कुल में ही जन्म लेते हैं । 10 लक्षण पर्व में अनेक पर्व व्रत और तीर्थंकरों के निर्माण कल्याणक आते हैं सत्य धर्म बड़ा पाव विधान है परम सत्य आत्मा है जिनवाणी को जनवाणी नहीं बनना चाहिए ।अनेकांत वाणी को समझे ,धर्म का स्वरूप नहीं बदले मोह से ज्ञान ढका है मोही रागी धर्म का स्वरूप समझ कर भी नहीं समझ रहे हैं हमारे वचनों से किसी को दुख नहीं होकर पर हित होना चाहिए।आगम को पढ़कर ,समझकर सत्य नहीं बोलना ,समझना जीवन का दुर्भाग्य है ।सत्य से शोभा होती है। यह मंगल देशना दशलक्षण धर्म में उत्तम सत्य धर्म की विवेचना में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दंग की नसिया धर्म सागर सभागृह सीकर में धर्मसभा में प्रकट की। डा राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रीराम ने भी सीता को पर पुरुष के यहां रहने के कारण अग्नि परीक्षा देने को कहा अग्निकुंड में जैसे ही सीता ने प्रवेश किया वह अग्निकुंड कमल का सिंहासन बन गया जो सत्य कहते हैं उनके देवता भी रक्षा करते हैं ।दूसरों को दुख उत्पन्न करने वाले वचन नहीं कहना चाहिए वचन कैसे बोलने की व्याख्या में बताया कि हमेशा हितकारी मधुर अमृत वचन बोलना चाहिए ।आत्मा ही सत्य है बाकी जगत संसार झूठ है कर्कश ,निष्ठुर, हिंसात्मक ,गर्वित, निंदक अप्रिय, पाप सहित वचन नहीं बोलना चाहिए। जिनवाणी आगम अनुसार वचन ही सत्य होते हैंआचार्य श्री ने बताया जब सत्य बोलने में बाधा हो तब मोन रहना चाहिए।कषायो से आत्मा मालिन है यह मलिनता धर्म आराधना से दूर होती है।प्रतिदिन श्रीजी के पंचामृत अभिषेक के पश्चात नित्य नियम पूजन विधानाचार्य पंडित कीर्तिय के निर्देशन में सभी इंद्र द्वारा की जा रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन में चढ़ाए जाने वाले द्रव्यों का महत्व प्रतिपादित किया जाता है दोपहर को तत्वार्थ सूत्र की विवेचना आचार्य श्री द्वारा की जाती है शाम को श्रीजी , मंडल विधान कीआरती के बाद आचार्य श्री की आरती होती है। रात्रि में मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। दस लक्षण पर्व में अनेक साधुओं,श्रावक श्राविकाओं की व्रत उपवास आराधना चल रही हैं।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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