मन,वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित् में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

मन,वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित् में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री का 77 वा अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया। परंपरा बुक का विमोचन आचार्य श्री ने किया।चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन।

सीकर

दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तमआर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दंग की नसिया धर्म सागर सभागार में अपने देशना में बताया कि आर्जवधर्म ऋजुता अर्थात सरलता सिखाता है ।सरलता जिसके जीवन में होती है वह मोक्ष मार्ग के निकट होता है। सर्प के उदाहरण से बताया कि सर्प बिल के बाहर आड़ा तिरछा चलता है किंतु जब बिल में आता है तब वह सीधा हो जाता है ,इसी प्रकार आपका असली घर मोक्ष है इस कारण आपको भी जीवन में सरलता लाना जरूरी है। डा राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि सरल शब्दों में मायाचारी का अभाव की सरलता होता है।

मन वचन काय की कुटिलता का परित्याग कर चित में सरलता निष्कपट भाव धारण करना उत्तम आर्ज़व धर्म है ।आचार्य श्री ने आगे बताया कि धर्म कुटिलता में नहीं होकर सरलता में होता है।चार कषायो में मायाचारी नर्क और त्रियंच गति का द्वार है मायाचारी दुर्भाग्य की जननी है सारे विश्व में ठग ही ठग है अनेक प्रपंचों से ठगा जाता है वास्तव में वह स्वयं को आत्मा को ठग रहे हैं मायाचारी से दुख कष्ट ही मिलता है। जीवन में जन्म सभी लेते हैं जन्म लेने वाले सभी धर्म धारण नहीं करते हैं ,धर्म दीक्षा लेने से ही धारण होता है।दीक्षा संन्यास से सुगति और सु गति से सिद्ध गति मिलती है। इसके पूर्व प्रात काल सभी मुनि राज् ,आर्यिका माताजी ने चरण वंदना कर तीन परिक्रमा लगाकर अपनी आचार्य भक्ति की। गुरूभक्तों ने जल दूध केशर रत्नो फल पुष्पों से चरण वंदना की। प्रातकाल आचार्य श्री ने सभी मंदिरों के दर्शन कर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक देखा। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व चित्र अनावरण एवं आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी पुण्यशाली परिवार द्वारा भेंट की गई। नृत्य मंगलाचरण से धर्म सभा का शुभारंभ हुआ श्रीमती तारा सेठी ,शशि पाटनी ग्रुप द्वारा आचार्य श्री के जीवन पर संक्षिप्त नाटिका की प्रस्तुति दी गई। आर्यिका श्री महायशमति एवं आर्यिका श्री दिव्ययश मति द्वारा संपादित परंपरा कृति का विमोचन आचार्य श्री , साधुओं, गजु भैय्या, सन्मति चांवरिया निवाई , श्रीमती कमला देवी , विनोद दगड़ा परिवार चेन्नई, राजेश पंचोलिया ने किया। गुरुभक्त रौनक जैन का सम्मान किया गया। मंच संचालन मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी ने कर आचार्य श्री के जीवन पर आधारित निबन्ध प्रतियोगिता में चयनित व्यक्तियों की घोषणा की।आचार्य श्री की अष्ट द्रव्यों से पूजन गुरू भक्तों ने की दोपहर को तत्त्वार्थ सूत्र की विवेचना आचार्य श्री ने की। आमंत्रित अतिथियों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के जीवन की चित्र प्रदर्शनी का उद्धाटन किया।शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री की सैकड़ों दीपको से महाआरती हुई। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी को पुरस्कृत किया गया।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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